
मुंबई। तंत्रज्ञान द्वारा आशय सामग्री का संरक्षण” विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में यह स्पष्ट रूप से सामने आया कि पायरसी अब केवल एक तकनीकी या कानूनी चुनौती नहीं रही, बल्कि यह वैश्विक मीडिया और मनोरंजन उद्योग के लिए एक बहुआयामी संकट बन चुकी है।
पायरसी को अब सीमांत चिंता न मानें” — नील गेन
IP House के एशिया-पैसिफिक प्रमुख नील गेन ने कहा, “पायरसी केवल एक सीमांत चिंता नहीं है, यह एक मुख्यधारा का खतरा है, जिसे केवल तकनीकी या कानूनी उपायों से नहीं, बल्कि समन्वित वैश्विक रणनीति के ज़रिए नियंत्रित किया जा सकता है।”
“2025 से 2029 तक 10% राजस्व हानि”— विवेक कौटो
मीडिया पार्टनर्स एशिया के कार्यकारी निदेशक विवेक कौटो ने आंकड़ों के माध्यम से चेताया कि अगर पायरसी पर कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो अगले पाँच वर्षों में उद्योग को 10% से अधिक राजस्व की हानि हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि ठोस पायरसी विरोधी रणनीति अपनाई जाए, तो कानूनी वीडियो सेवाओं में 25% तक वृद्धि और कंटेंट निवेश में 0.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर की बढ़त संभव है।
“पायरसी और साइबर अपराध में गहरा संबंध: डॉ. श्रुति मंत्री
ISB इंस्टीट्यूट ऑफ डेटा साइंस की सह-निदेशक डॉ. श्रुति मंत्री ने पायरसी के साइबर सुरक्षा से जुड़े पक्ष को उजागर किया। उन्होंने बताया कि ट्रोजन, रैंसमवेयर और स्पायवेयर जैसे साइबर खतरों का प्रयोग पायरेटेड कंटेंट के ज़रिए तेजी से बढ़ा है, और 18 से 24 वर्ष की आयु के युवा सबसे अधिक असुरक्षित हैं। उन्होंने ग्राहकों में जागरूकता और शैक्षणिक पहलों पर बल दिया, साथ ही 9-10 जुलाई को CBI और इंटरपोल के साथ आयोजित होने वाले डिजिटल पायरसी विरोधी शिखर सम्मेलन की घोषणा की।
“तीन D रणनीति” — अनुराग कश्यप, DAZN
DAZN के पायरसी विरोधी प्रमुख अनुराग कश्यप ने अपनी रणनीति को “Detection, Disruption और Deterrence” — तीन D पर आधारित बताया। उन्होंने कहा, “हम लाइव स्ट्रीमिंग से पहले ही निगरानी शुरू कर देते हैं। अदृश्य वॉटरमार्किंग हमारी पहचान प्रणाली का आधार है।”
“सबसे प्रभावी उपाय – मुकदमा” — अनिल लाले, जिओ हॉटस्टार
जिओ हॉटस्टार के लीगल प्रमुख अनिल लाले ने कहा कि पायरसी से निपटने के लिए कठोर कानूनी कार्रवाई अनिवार्य है। उन्होंने कहा, “हमें सतही कार्रवाइयों की बजाय सटीक फोकस के साथ न्यायिक हस्तक्षेप करना होगा।
AI और ब्लॉकचेन आधारित समाधान जरूरी” — प्रवीण आनंद
प्रवीण आनंद (आनंद एंड आनंद) ने न्यायिक और तकनीकी उपायों के तालमेल पर बल दिया। उन्होंने AI, ब्लॉकचेन, और वॉटरमार्किंग जैसे तकनीकी समाधानों के साथ-साथ कैमकोर्डिंग रोकने के लिए भौतिक उपायों जैसे “धातु डिटेक्टर” की भी वकालत की। सभी वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि प्रौद्योगिकी, कानून, प्रवर्तन एजेंसियां और जन जागरूकता — इन चारों स्तंभों के बीच सहयोग ही डिजिटल सामग्री की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकता है। WAVES 2025 में इस विषय पर हुई चर्चा ने इस उद्योग के लिए एक नई दिशा और चेतावनी दोनों प्रदान की है।




