
मुंबई। देश के समग्र विकास के लिए महिलाओं की 50 प्रतिशत भागीदारी अनिवार्य है। जब तक महिलाओं को बराबरी का प्रतिनिधित्व नहीं मिलेगा, तब तक भारत विकसित राष्ट्र नहीं बन सकता। यह बात महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को ‘नारीशक्ति वंदन महिला सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए कही। नारीशक्ति विचार मंच द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास मंत्री आदिती तटकरे, विधायक चित्रा वाघ, अमित साटम, मनीषा चौधरी, एसएनडीटी विश्वविद्यालय की कुलगुरु उज्वला चक्रदेव, अभिनेत्री रवीना टंडन, प्राजक्ता माळी, पार्श्वगायिका वैशाली सामंत, फैशन डिजाइनर अर्चना स्नेहलका स्वामी और ग्लोबल टीचर अवॉर्ड से सम्मानित रुबल नेगी सहित बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित रहीं।मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि ‘नारीशक्ति वंदन विधेयक’ के माध्यम से महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिलने का मार्ग प्रशस्त हुआ है, जिससे भविष्य में संसद और राज्य विधानमंडलों में महिलाओं की संख्या में ऐतिहासिक वृद्धि होगी। उन्होंने विश्वास जताया कि वर्तमान में लोकसभा में 73 महिला सांसद हैं, जो 2029 तक बढ़कर लगभग 273 हो सकती हैं।उन्होंने कहा कि पूर्व में अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में महिला आरक्षण विधेयक प्रस्तुत किया गया था, लेकिन बहुमत के अभाव में पारित नहीं हो सका। बाद की सरकारों में भी इसे पर्याप्त समर्थन नहीं मिला। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दृढ़ इच्छाशक्ति के कारण यह विधेयक आगे बढ़ पाया है। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि जनगणना और परिसीमन (डिलिमिटेशन) को लेकर उठ रहे सवालों के बावजूद यह विधेयक 2011 की जनगणना के आधार पर लागू किया जा रहा है और आगे परिसीमन की प्रक्रिया भी शुरू होगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ और ‘लखपती दीदी’ जैसे अभियानों के माध्यम से महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। इन योजनाओं के परिणामस्वरूप लिंग अनुपात में सुधार और महिलाओं की शिक्षा व आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिला है।महाराष्ट्र के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में पहली बार कई महत्वपूर्ण पदों पर महिलाओं ने नेतृत्व संभाला है, जिसमें मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और बृहन्मुंबई महानगरपालिका आयुक्त जैसे पद शामिल हैं। स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व 55 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो एक सकारात्मक बदलाव का संकेत है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रारंभ में ‘सरपंच पति’ या ‘नगरसेविका पति’ जैसी प्रवृत्तियां देखने को मिलती थीं, लेकिन अब महिलाएं अपनी क्षमता के आधार पर नेतृत्व कर रही हैं और प्रभावी निर्णय ले रही हैं। कार्यक्रम के दौरान महिलाओं की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में एम्स के आठ में से छह स्वर्ण पदक छात्राओं ने प्राप्त किए। उन्होंने कहा कि सेना, अंतरिक्ष अनुसंधान सहित हर क्षेत्र में महिलाएं अपनी क्षमता साबित कर रही हैं। कार्यक्रम की शुरुआत में राजमाता जिजाऊ, रानी लक्ष्मीबाई, सावित्रीबाई फुले और आनंदीबाई जोशी के जीवन पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं। इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को मुख्यमंत्री के हाथों सम्मानित भी किया गया।




