
मुंबई। राज्य में मानव और वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए पहले चरण में 10 नियंत्रण कक्ष स्थापित करने, 1000 गांवों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित अलर्ट प्रणाली लागू करने तथा 2 रेस्क्यू सेंटर और 10 उपचार केंद्र स्थापित करने को राज्य वन्यजीव मंडल की स्थायी समिति की बैठक में मंजूरी दी गई। वन मंत्री गणेश नाईक ने बताया कि यह लगभग 260 करोड़ रुपये की परियोजना है और मानवों पर वन्यजीवों के हमले रोकने के लिए इन उपायों को तत्काल लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। मंगलवार को मंत्रालय में आयोजित राज्य वन्यजीव मंडल की स्थायी समिति की बैठक वन मंत्री गणेश नाईक की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में विधायक समीर मेघे, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वनबल प्रमुख) श्रीनिवास राव, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एम. श्रीनिवास रेड्डी, उपसचिव निकिता पांडे, विशेष कार्य अधिकारी उदय ढगे सहित समिति के सदस्य उपस्थित थे। राज्य में मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने और जनहानि कम करने के लिए वन विभाग द्वारा एक व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई है। इसके अंतर्गत पुलिस कंट्रोल रूम की तर्ज पर राज्य के विभिन्न हिस्सों में 10 अत्याधुनिक डिजिटल नियंत्रण कक्ष स्थापित किए जाएंगे। इन कंट्रोल रूम के माध्यम से वन विभाग के संसाधनों, वाहनों और गश्ती दलों की निगरानी की जाएगी। यदि किसी क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति उत्पन्न होती है, तो संबंधित लोगों को तुरंत सूचना देकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। वन क्षेत्रों से लगे गांवों में वन्यजीवों की मौजूदगी की जानकारी ग्रामीणों तक तुरंत पहुंचाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित अलर्ट प्रणाली पहले प्रायोगिक तौर पर शुरू की गई थी। इसकी सफलता को देखते हुए अब इसे राज्य के लगभग 1000 गांवों में लागू किया जाएगा। इससे ग्रामीणों को वन्यजीवों की गतिविधियों की समय पर जानकारी मिल सकेगी और वे सतर्क रह सकेंगे। इसके अलावा पकड़े गए वन्यजीवों के लिए रेस्क्यू सेंटर स्थापित किए जाएंगे तथा घायल वन्यजीवों के उपचार के लिए 10 स्थानों पर ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर भी बनाए जाएंगे। वन्यजीवों को सुरक्षित पकड़ने और बचाव कार्य के लिए 20 स्थानों पर रैपिड रेस्क्यू टीम गठित की जाएगी। वहीं वन क्षेत्रों से सटे गांवों में वन विभाग की सहायता के लिए 2000 प्राथमिक प्रतिसाद दल (प्राइमरी रिस्पॉन्स टीम) तैयार किए जाएंगे। फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले हिरण, बंदर और जंगली सूअर जैसे जानवरों को पकड़ने के लिए दो विशेष मोबाइल दल भी बनाए जाएंगे। ये दल प्रभावित क्षेत्रों में जाकर जानवरों को पकड़कर दोबारा वन क्षेत्र में छोड़ने का कार्य करेंगे। इन टीमों को आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित किया जाएगा। साथ ही बंदरों और जंगली सूअरों की बढ़ती संख्या नियंत्रित करने के लिए राज्य में दो नसबंदी केंद्र स्थापित करने का भी प्रस्ताव है। वन मंत्री गणेश नाईक ने कहा कि इन उपायों से मानव-वन्यजीव संघर्ष कम होगा, किसानों की फसलों को होने वाले नुकसान में कमी आएगी और ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी। इसलिए इन योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।




