बिगड़ती तबीयत के बीच जारांगे का प्लान बदला, बोले- सीधे मुंबई जाऊंगा

पुणे-रायगढ़ में निर्धारित पड़ाव छोड़ने का ऐलान; डॉक्टरों ने अस्पताल में भर्ती होने की दी सलाह, आजाद मैदान में आंदोलन की अनुमति पर भी संशय

मुंबई। मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जारांगे पाटिल ने अपनी बिगड़ती तबीयत के बीच मुंबई यात्रा की रणनीति में बदलाव का संकेत दिया है। बुधवार को बीड जिले के पटोदा में उन्होंने समर्थकों से कहा कि स्वास्थ्य ने साथ दिया तो वे निर्धारित पड़ावों पर रुकने के बजाय सीधे मुंबई की ओर बढ़ेंगे। इससे पहले उनकी यात्रा 19 सितंबर के आसपास मुंबई पहुंचने के कार्यक्रम के अनुसार चल रही थी। जारांगे ने 15 सितंबर को जालना जिले के अंतरवाली सराटी से मुंबई की ओर यात्रा शुरू की थी। बुधवार को पटोदा पहुंचने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई। बीड जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. सतीशकुमार सोलंके के मुताबिक, जारांगे डिहाइड्रेशन की स्थिति में थे और उन्हें अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता थी। डॉक्टर ने इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन का खतरा बताते हुए कहा कि केवल IV फ्लूइड के सहारे लंबी यात्रा करना उचित नहीं है। जारांगे ने भी दिन में स्वीकार किया कि लंबी यात्रा और लगातार अनशन का उनकी सेहत पर असर पड़ रहा है तथा जरूरत पड़ने पर मुंबई यात्रा रद्द भी की जा सकती है। उन्होंने समर्थकों से उनके काफिले के पीछे नहीं आने और उन्हें सीमित साथियों के साथ आगे बढ़ने देने की अपील की। जारांगे मराठा समुदाय के पात्र लोगों को पुराने सरकारी अभिलेखों और कुनबी वंशावली के आधार पर कुनबी प्रमाणपत्र जारी करने सहित आरक्षण संबंधी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। सरकारी समिति द्वारा बड़ी संख्या में पुराने अभिलेख खोजे जाने और प्रमाणपत्र जारी किए जाने की प्रक्रिया भी इस आंदोलन के केंद्र में रही है। मुंबई में प्रस्तावित आंदोलन को लेकर पुलिस और जारांगे के बीच अनुमति का मुद्दा भी बना हुआ है। मुंबई पुलिस ने गणेशोत्सव के दौरान कानून-व्यवस्था और नागरिकों को होने वाली संभावित असुविधा का हवाला देते हुए आजाद मैदान में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की अनुमति से इनकार किया था। इसके बाद जारांगे की ओर से अनुमति के लिए नया आवेदन दिया गया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को कहा था कि जारांगे की 13 मांगों में से 12 “कानूनी रूप से वैध” मांगों को सरकार स्वीकार कर चुकी है और शेष मांग में कानूनी अड़चन है। उन्होंने गणेशोत्सव के दौरान आंदोलन से आम लोगों को असुविधा न हो, इस पर भी जोर दिया था। यह सरकार का पक्ष है, जबकि जारांगे का कहना है कि उनकी प्रमुख आरक्षण संबंधी मांगों का पूर्ण समाधान अभी नहीं हुआ है। जारांगे ने अपने समर्थकों से आंदोलन के दौरान अनुशासन बनाए रखने और आम नागरिकों को परेशानी नहीं पहुंचाने की अपील की है। फिलहाल उनकी आगे की मुंबई यात्रा काफी हद तक स्वास्थ्य और प्रशासनिक अनुमति की स्थिति पर निर्भर है।

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