आयुष्मान का भरोसा या व्यवस्था की भूलभुलैया
डॉ. दीपक गोस्वामी हमारे देश में गरीबों को आयुष्मान योजना के द्वारा पाँच लाख रुपये तक के स्वास्थ्य सुरक्षा कवच
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Read Moreसौरभ वार्ष्णेयडिजिटल तकनीक ने जीवन को जितना सरल बनाया है, उतना ही साइबर अपराधियों के लिए ठगी के नए रास्ते
Read Moreसौरभ वार्ष्णेयस्वास्थ्य किसी भी सभ्य समाज की बुनियादी आवश्यकता है और जीवन बचाने वाली दवाओं तक सुलभ पहुंच प्रत्येक नागरिक
Read Moreकुमार कृष्णनबिहार विधान परिषद की आठ सीटों के चुनाव परिणामों को केवल उम्मीदवारों की जीत-हार के रूप में देखना राजनीति
Read Moreडॉ. दीपक गोस्वामीकरवा चौथ की परंपरा अनेक लोककथाओं और क्षेत्रीय मान्यताओं से समृद्ध हुई है। वीरवती की कथा इस पर्व
Read Moreवन वर्माश्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं…अनुद्वेगकरं वाक्यं सत्यं प्रियहितं च यत्। स्वाध्यायाभ्यसनं चैव वाङ्मयं तप उच्यते।।अर्थात ऐसी वाणी, जो
Read Moreडॉ.सुधाकर आशावादीआम आदमी की दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए रोटी, कपड़ा और मकान की उपलब्धता एक बड़ी समस्या है।
Read Moreडॉ. रविशंकर कुमार चौधरीशिक्षा व्यवस्था में सब कुछ ठीक है, तो फिर कक्षाओं में पढ़ाई को लेकर सवाल क्यों उठ
Read Moreमहेन्द्र तिवारीफ्रांस वर्तमान में एक अभूतपूर्व और भीषण जन आंदोलन का सामना कर रहा है, जिसने पूरे देश के सामाजिक
Read Moreविवेक रंजन श्रीवास्तवलोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत चुनाव हैं, लेकिन उसकी विश्वसनीयता केवल मतदान प्रतिशत से नहीं, चुनाव की निष्पक्षता
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