घाटकोपर हादसा: नाबालिग आरोपी को बॉम्बे हाई कोर्ट से राहत नहीं, जमानत रद्द करने का फैसला बरकरार

स्टंट के वीडियो और जमानत की शर्त के उल्लंघन पर कोर्ट ने जताई चिंता; हादसे में स्कूटर सवार की हुई थी मौत, पत्नी हुई गंभीर रूप से दिव्यांग

मुंबई। घाटकोपर के विद्या विहार इलाके में हुए घातक सड़क हादसे के मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने घटना के समय नाबालिग रहे आरोपी को राहत देने से इनकार कर दिया है। न्यायमूर्ति शिवकुमार डिगे ने सेशंस कोर्ट द्वारा उसकी जमानत रद्द किए जाने के फैसले को बरकरार रखते हुए रिवीजन अर्जी खारिज कर दी। अदालत ने उसके पहले के कथित स्टंट ड्राइविंग व्यवहार, जमानत की शर्तों के पालन और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को ध्यान में रखा। मामला 5 फरवरी 2026 की रात का है। अभियोजन के अनुसार, तब 17 वर्ष 8 महीने का आरोपी अपने पिता की SUV चला रहा था, जिसने विद्या विहार में सोमैया कॉलेज के पास स्कूटर को टक्कर मार दी। हादसे में 33 वर्षीय व्यवसायी ध्रुमिल पटेल गंभीर रूप से घायल हुए और 10 दिन बाद उनकी मौत हो गई। उनकी पत्नी मीनल पटेल भी गंभीर रूप से घायल हुईं और रिपोर्टों के अनुसार स्थायी दिव्यांगता का सामना कर रही हैं।
Instagram पर स्टंट के वीडियो बने अहम आधार
हाई कोर्ट ने आरोपी के सार्वजनिक Instagram अकाउंट पर कथित तौर पर पोस्ट किए गए स्टंट के वीडियो और स्क्रीनशॉट पर गौर किया। रिकॉर्ड में एक कार के बोनट पर व्यक्ति के लेटे होने और अन्य लोगों के बिना सीट बेल्ट वाहन से बाहर लटकने जैसी गतिविधियों का उल्लेख था। अन्य सामग्री में स्कूटर पर दो लोगों को पीछे बैठाकर व्हीली करने का भी जिक्र है। अदालत ने माना कि ऐसी गतिविधियां आरोपी के साथ-साथ आसपास मौजूद लोगों की सुरक्षा को भी खतरे में डालती थीं। जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने मार्च में आरोपी को जमानत दी थी। बाद में पीड़ित पक्ष की अपील पर सेशंस कोर्ट ने 31 जुलाई को जमानत रद्द कर उसे सुधार गृह भेजने का निर्देश दिया। आरोपी ने इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।
जमानत पर बाहर आने के बाद पते पर नहीं मिला
हाई कोर्ट ने इस तथ्य को भी महत्वपूर्ण माना कि जमानत मिलने के बाद आरोपी को नवी मुंबई के कोपरखैरने स्थित एक पते पर रहने को कहा गया था, लेकिन पुलिस की जांच में वह वहां नहीं मिला। अदालत ने इसे वैधानिक प्राधिकरण के आदेशों के प्रति सम्मान की कमी के संकेत के रूप में देखा। अभियोजन ने यह भी आरोप लगाया कि मामला दर्ज होने के बाद Instagram अकाउंट से स्टंट से जुड़े वीडियो और तस्वीरें हटा दी गईं। अदालत ने इस पहलू को भी रिकॉर्ड पर लिया। हाई कोर्ट ने कहा कि माता-पिता का पर्याप्त नियंत्रण नहीं होने और स्टंट करने वाले दोस्तों की संगत जैसे पहलुओं को देखते हुए आरोपी को फिर ऐसी गतिविधियों में शामिल होने का खतरा नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत ने माना कि ऐसे में उसकी रिहाई न्याय के उद्देश्य को प्रभावित कर सकती है और सेशंस कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप का आधार नहीं बनता। मीनल पटेल की ओर से अधिवक्ता अथर्व दांडेकर, रूबेन मस्कारेनहास और तेजस गुप्ता सहित वकीलों ने अर्जी का विरोध किया, जबकि राज्य की ओर से अतिरिक्त सरकारी वकील बी.बी. कुलकर्णी पेश हुए।

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