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प्रत्येक कार्यालय में महिलाओं की शिकायत निवारण समिति अनिवार्य, न बनाने पर 50,000 रुपए का जुर्माना: जिलाधिकारी संजय यादव

मुंबई। कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बने कानून के तहत सभी सरकारी, अर्ध-सरकारी और निजी कार्यालयों में आंतरिक शिकायत निवारण समिति का गठन अनिवार्य है। इस नियम का पालन न करने पर संबंधित कार्यालय या संस्थान पर 50,000 रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। यह जानकारी मुंबई शहर के जिलाधिकारी संजय यादव ने दी। जिन कार्यालयों में 10 या अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं, वहां यह समिति बनाना अनिवार्य होगा। समिति में कार्यालय की वरिष्ठ महिला को अध्यक्ष नियुक्त किया जाएगा, साथ ही सामाजिक कार्य या कानून की जानकारी रखने वाले दो कर्मचारी और महिलाओं के मुद्दों से जुड़ी किसी गैर-सरकारी संस्था (NGO) का एक सदस्य शामिल होगा। हर कार्यालय को यह सुनिश्चित करना होगा कि इस समिति के गठन की सूचना प्रमुख स्थान पर बोर्ड के माध्यम से प्रदर्शित की जाए, और हर तीन वर्ष में समिति का पुनर्गठन भी आवश्यक होगा। यह निर्देश जिले के उप-जिल्हाधिकारी (सा.प्र.) एवं जिलाधिकारी गणेश सांगळे ने दिए। कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न से संरक्षण अधिनियम, 2013 के तहत, प्रत्येक सरकारी/अर्ध-सरकारी कार्यालय, निगम, संस्थान, उद्योग, व्यापार, वित्तीय और स्वास्थ्य सेवाओं, शैक्षणिक संस्थान, मनोरंजन केंद्र, अस्पताल, नर्सिंग होम, खेल संस्थान, ऑडिटोरियम, खेल परिसर आदि में यह समिति बनाना अनिवार्य है। जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी शोभा शेलार ने कहा कि अधिनियम में उल्लिखित सभी सरकारी और निजी कार्यालयों में इस समिति का गठन अनिवार्य रूप से किया जाना चाहिए। नियमों का पालन न करने वालों पर कार्रवाई होगी।

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