
मुंबई। महाराष्ट्र सरकार अत्याचार पीड़ित महिलाओं को अधिक प्रभावी सहायता उपलब्ध कराने के लिए राज्य के सभी तहसीलों तक महिला परामर्श केंद्रों (काउंसलिंग सेंटर) का विस्तार करने की तैयारी कर रही है। इसके साथ ही महिला परामर्शदाताओं के मानदेय और केंद्र संचालित करने वाली संस्थाओं को दिए जाने वाले प्रशासनिक अनुदान में भी सम्मानजनक बढ़ोतरी की जाएगी। यह जानकारी महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने गुरुवार को विधान परिषद में दी। विधान परिषद में सदस्य माधवी नाइक द्वारा उठाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का जवाब देते हुए मंत्री तटकरे ने कहा कि महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से राज्यभर के पुलिस थानों के परिसर में महिला परामर्श केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों के माध्यम से घरेलू हिंसा और अन्य अत्याचार की शिकार महिलाओं को भावनात्मक सहयोग, मानसिक परामर्श, कानूनी सहायता, अस्थायी आश्रय तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का कार्य किया जाता है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में मुंबई शहर और उपनगरों में कार्यरत परामर्शदाताओं को प्रतिमाह 15 हजार रुपये, अन्य जिलों में 12 हजार रुपये तथा समन्वयकों को 25 हजार रुपये मानदेय दिया जाता है। इसके अलावा प्रशिक्षण एवं कार्यशालाओं के लिए 30 हजार रुपये तथा प्रशासनिक खर्च के लिए 13,366 रुपये का अनुदान उपलब्ध कराया जाता है। बढ़ते कार्यभार को देखते हुए मानदेय और प्रशासनिक अनुदान बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है, जिसे आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर जल्द ही सरकार के समक्ष पुनः प्रस्तुत किया जाएगा। अदिति तटकरे ने बताया कि मुंबई उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार जिला स्तर पर महिला परामर्श केंद्र शुरू किए गए थे। अब इन्हें चरणबद्ध तरीके से सभी तहसील स्तर तक विस्तारित करने की दिशा में विभाग सकारात्मक रूप से कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) तैयार की जा रही है, जिसमें महिला एवं बाल विकास, गृह तथा विधि एवं न्याय विभाग के बीच समन्वित व्यवस्था विकसित की जाएगी। इससे पीड़ित महिलाओं को अलग-अलग सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और उन्हें एक ही स्थान पर समेकित सहायता उपलब्ध हो सकेगी। मंत्री ने बताया कि वन स्टॉप सेंटर के संचालन को लेकर सदस्यों द्वारा दिए गए सुझावों पर भी गंभीरता से विचार किया जाएगा। इस विषय पर जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में अलग से बैठक आयोजित कर आवश्यक निर्णय लिए जाएंगे।उन्होंने कहा कि स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं, जिला परिषदों और राज्य महिला आयोग के माध्यम से संचालित परामर्श केंद्रों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर बंद पड़े केंद्रों को दोबारा शुरू करने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही परामर्श केंद्रों की संख्या बढ़ाने, प्रशिक्षण एवं कार्यशालाओं के लिए अधिक बजट उपलब्ध कराने तथा प्रशासनिक खर्च में वृद्धि करने पर भी सरकार सकारात्मक है। अदिति तटकरे ने कहा कि वर्तमान में परामर्शदाताओं को टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टीआईएसएस) के माध्यम से आधुनिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। भविष्य में इस प्रशिक्षण व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाया जाएगा, ताकि पीड़ित महिलाओं को बेहतर और संवेदनशील सहायता उपलब्ध कराई जा सके।



