
मुंबई। अंधविश्वास और ढोंगी बाबाओं के खिलाफ जनजागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति ने ‘विवेक जागर’ पहल के तहत दादर में एक व्यापक अभियान चलाया। यह कार्यक्रम दादर रेलवे स्टेशन (पश्चिम) के पास आयोजित किया गया, जहां कार्यकर्ताओं ने पोस्टर, गीतों और सीधे संवाद के माध्यम से लोगों को जागरूक किया।यह अभियान स्वयंभू बाबा अशोक खरात से जुड़े हालिया विवाद के बाद उत्पन्न जनआक्रोश के बीच आयोजित किया गया। आयोजकों ने इस मामले को केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि अंधविश्वास से जुड़ी व्यापक सामाजिक समस्या का हिस्सा बताया। अभियान में राज्य पदाधिकारी विजय परब, नंदकिशोर तलाशीलकर और रूपेश शोभा के साथ मुंबई के दादर, दहिसर, कुर्ला, घाटकोपर और चेंबूर क्षेत्रों के कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। इस मौके पर सामाजिक कार्यकर्ता आनंद पटवर्धन और वरिष्ठ नागरिक समूहों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि 21वीं सदी में भी वैज्ञानिक सोच की कमी के कारण लोग अंधविश्वास और धोखाधड़ी का शिकार हो रहे हैं। सामाजिक दबाव, भय और व्यक्तिगत समस्याओं के चलते विशेष रूप से महिलाएं ऐसे ढोंगी बाबाओं के जाल में फंस जाती हैं, जिससे यौन शोषण और आर्थिक ठगी के कई मामले सामने आते हैं। अभियान के दौरान ज्योतिष, तांत्रिक अनुष्ठानों और तथाकथित चमत्कारी उपचारों जैसी प्रथाओं की वैधता पर भी सवाल उठाए गए। वक्ताओं ने लोगों से शिक्षा, तर्कसंगत सोच और आत्मविश्वास पर भरोसा करने की अपील की। कानूनी पहलुओं पर जोर देते हुए नंदकिशोर तलाशीलकर ने अंधश्रद्धा विरोधी कानून के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग की। उन्होंने सुझाव दिया कि पुलिस थानों में विशेष इकाइयों का गठन कर ऐसे मामलों पर कड़ी निगरानी रखी जाए। समिति ने नागरिकों से अपील की कि वे अंधविश्वास और धोखाधड़ी से जुड़े मामलों की रिपोर्ट करने में आगे आएं। साथ ही पीड़ितों को गोपनीयता बनाए रखते हुए निःशुल्क कानूनी और परामर्श सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया। इस अभियान को आम जनता से जोरदार समर्थन मिला, जहां कई लोगों ने खुलकर अपनी नाराजगी व्यक्त की और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।




