
मुंबई। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मुंबई ज़ोनल कार्यालय ने यूनाइटेड सर्विसेज़ (यूएस) क्लब से जुड़े कथित 77 करोड़ रुपये के वित्तीय धोखाधड़ी मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 35 चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से ज़ब्त कर लिया है। ज़ब्त की गई संपत्तियों की कुल कीमत 34.51 करोड़ रुपये बताई गई है, जिनमें फ्लैट, दुकानें और फिक्स्ड डिपॉज़िट शामिल हैं। सोमवार को अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, ये संपत्तियां बर्नाडेट भारत वर्मा, उनके पति भारतकुमार शंकरलाल वर्मा और अन्य संबंधित व्यक्तियों के नाम पर हैं। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई है। ईडी ने इस मामले की जांच फरवरी 2025 में कफ परेड पुलिस स्टेशन में दर्ज एफ़आईआर के आधार पर शुरू की थी। एफ़आईआर में दक्षिण मुंबई स्थित यूएस क्लब में बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ी और गबन के आरोप लगाए गए थे। जांच में सामने आया कि यूएस क्लब में उप सचिव (वित्त) के पद पर कार्यरत बर्नाडेट वर्मा ने कथित तौर पर अपने पति के साथ मिलकर फर्जी और डमी बैंक खातों के जरिए इस घोटाले को अंजाम दिया। ये खाते असली वेंडरों के नाम से मिलते-जुलते नामों पर खोले गए थे, जिससे बिना संदेह पैदा किए रकम का ट्रांसफर किया जा सके। ईडी के मुताबिक, इन खातों के माध्यम से करीब 77 करोड़ रुपये का गबन किया गया। इसके बाद इस रकम को आरोपियों, उनके परिवार और करीबी सहयोगियों के खातों में ट्रांसफर कर उसकी असली पहचान छिपाने की कोशिश की गई। जांच में यह भी सामने आया कि इस अवैध धन का उपयोग मुंबई में कई संपत्तियां खरीदने और बैंकों में फिक्स्ड डिपॉज़िट के रूप में निवेश करने में किया गया, ताकि इसे वैध दिखाया जा सके। इसके अलावा, करीब 11 करोड़ रुपये ‘ज्योतिर्गमय फाउंडेशन’ नामक एक ट्रस्ट के खाते में ट्रांसफर किए गए थे। वहां से यह रकम कथित तौर पर चार्टर्ड अकाउंटेंट चंद्र प्रकाश पांडे, उनके परिजनों और उनके नियंत्रण वाली फर्मों के खातों में भेजी गई। पांडे का यूएस क्लब से पेशेवर संबंध भी बताया जा रहा है। ईडी को संदेह है कि इस पूरे मामले में कई अन्य व्यक्ति और संस्थाएं भी शामिल हो सकती हैं, जो धन के डायवर्जन और लेयरिंग में भूमिका निभा रहे थे। फिलहाल एजेंसी पूरे वित्तीय नेटवर्क की गहन जांच कर रही है और आगे और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।




