
अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस पर नागपुर में विशेष सम्मेलन; मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने से लेकर हरित आजीविका और टिकाऊ पर्यटन तक व्याघ्र संरक्षण की नई पंचसूत्री
नागपुर। महाराष्ट्र में प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखते हुए वैज्ञानिक दृष्टिकोण से बाघों के संरक्षण का काम आगे बढ़ाया जा रहा है। राज्य सरकार ने अब व्याघ्र संरक्षण के लिए नई पंचसूत्री तैयार की है। बुधवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि सरकार बाघों के संरक्षण को स्थानीय लोगों की आजीविका, पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए मूल्य-आधारित व्याघ्र संरक्षण की दिशा में काम कर रही है। अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर वन विभाग द्वारा नागपुर स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) में आयोजित सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री फडणवीस ने यह बात कही। कार्यक्रम में वन मंत्री गणेश नाईक, स्कूली शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. पंकज भोयर, वित्त एवं नियोजन राज्यमंत्री एड. आशिष जयस्वाल, मुख्यमंत्री के मुख्य आर्थिक सलाहकार प्रवीण परदेशी, वन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव मिलिंद म्हैसकर, प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्रीनिवास राव सहित कंबोडिया, भूटान और बांग्लादेश के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
2014 में 190 बाघ, अब संख्या 444
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि बाघ प्राकृतिक आवास और खाद्य श्रृंखला का महत्वपूर्ण केंद्र है। बाघों के संरक्षण से जंगलों और पर्यावरण का भी संरक्षण होता है। इसी कारण महाराष्ट्र में वैज्ञानिक पद्धति से व्याघ्र संरक्षण की योजनाएं लागू की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि राज्य के छह टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्रों से गांवों का पुनर्वास किया गया है और नए बफर क्षेत्र तैयार किए गए हैं। वन विभाग की नई नीति के कारण टाइगर रिजर्व से सटे गांवों के निवासी भी पुनर्वास और स्थानांतरण के लिए आगे आ रहे हैं। मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए टाइगर रिजर्व से सटे गांवों में योजनाबद्ध व्यवस्था लागू की गई है। बाघों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए कैमरा ट्रैकिंग और एआई आधारित अर्ली वार्निंग सिस्टम जैसे उपाय किए गए हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार इन प्रयासों के परिणामस्वरूप 2014 में महाराष्ट्र में बाघों की संख्या 190 थी, जो बढ़कर 444 हो गई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि नई बाघ गणना में राज्य में बाघों की संख्या 600 से अधिक दिखाई दे सकती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दुनिया की कुल बाघ आबादी का करीब 75 प्रतिशत भारत में है और भारत में बाघों की संख्या के मामले में महाराष्ट्र तीसरे स्थान पर है। पिछले दो दशकों में उठाए गए संरक्षण संबंधी कदमों के कारण महाराष्ट्र अब देश में पहले स्थान की दिशा में आगे बढ़ रहा है। सरकार का प्रयास बाघों के अस्तित्व और संरक्षण को मानव आजीविका के साथ जोड़कर ऐसा मॉडल विकसित करना है, जिससे स्थानीय समुदायों को भी संरक्षण का प्रत्यक्ष लाभ मिले।
व्याघ्र संरक्षण की नई पंचसूत्री
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने व्याघ्र संरक्षण के लिए पांच प्रमुख क्षेत्रों पर आधारित रणनीति तैयार की है। इसमें मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करना, व्याघ्र आवास क्षेत्रों में हरित आजीविका अभियान चलाना, व्याघ्र संरक्षण के लिए CSR निधि जुटाने की नीति बनाना, टिकाऊ पर्यटन के जरिए रोजगार पैदा करना और पर्यटन को बढ़ावा देते हुए वन संरक्षण के लिए आवश्यक धन उपलब्ध कराना शामिल है। इस रणनीति के माध्यम से बाघ संरक्षण के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था, रोजगार और वन क्षेत्र के संरक्षण को एक-दूसरे से जोड़ने पर जोर दिया जाएगा।
300 करोड़ वृक्षारोपण का लक्ष्य, पांच टिश्यू कल्चर प्रयोगशालाएं
वन मंत्री गणेश नाईक ने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के मार्गदर्शन में वन विभाग में नई अवधारणाओं को लागू किया जा रहा है। व्याघ्र संरक्षण के साथ राज्य में बड़े स्तर पर वृक्षारोपण की दिशा में भी काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वन विभाग ने राज्य में 300 करोड़ वृक्षारोपण का लक्ष्य रखा है। बड़ी संख्या में पौधे तैयार करने के लिए महाराष्ट्र में पांच स्थानों पर टिश्यू कल्चर प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं। राज्यमंत्री डॉ. पंकज भोयर ने विश्वास जताया कि अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर आयोजित इस सम्मेलन से राज्य के टाइगर रिजर्व में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
मुख्यमंत्री की मौजूदगी में 11 समझौते
सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मौजूदगी में व्याघ्र संरक्षण, पर्यटन और स्थानीय विकास से जुड़े कुल 11 समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इनमें आईआरसीटीसी और वन विभाग के बीच टिकाऊ वन्यजीव पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए समझौता किया गया। बायएफ और वन विभाग के बीच एचडीएफसी बैंक के परिवर्तन CSR उपक्रम के माध्यम से नागपुर जिले के पारशिवनी तालुका में ‘समृद्धि परियोजना’ लागू करने के लिए करार हुआ। इसके अलावा आरोहा ग्रुप, महिंद्रा हॉलिडेज एंड रिसॉर्ट्स इंडिया लिमिटेड और महाराष्ट्र वन विभाग के बीच टिकाऊ पर्यटन पर आधारित पांच सितारा लक्जरी परियोजना विकसित करने के लिए समझौता किया गया। सम्मेलन में समुदाय आधारित आजीविका और हरित अर्थव्यवस्था, व्याघ्र संरक्षण में CSR निवेश, महाराष्ट्र को भारत के प्रमुख टाइगर पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने तथा मानव-बाघ सहअस्तित्व और पारिस्थितिकी संरक्षण जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने प्रस्तुतियां दीं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने व्याघ्र संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वालों को एशियाटिक बिग कैट सोसायटी के राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किए। कार्यक्रम की शुरुआत में प्रधान वन संरक्षक एम. एस. रेड्डी ने प्रस्तावना रखी। मुख्यमंत्री के मुख्य आर्थिक सलाहकार प्रवीण परदेशी ने नागपुर ग्रोथ के माध्यम से व्याघ्र संरक्षण के लिए किए गए विभिन्न उपायों की जानकारी दी, जबकि नागपुर विभाग के वन संरक्षक जी. गुरुप्रसाद ने आभार व्यक्त किया।





