
मुंबई। खार पूर्व के झोपड़पट्टी इलाकों में प्रॉपर्टी की दलाली का कारोबार तेजी से फैलता नजर आ रहा है। पान की दुकान चलाने वाले, चाय की दुकान चलाने वाले और टेलरिंग का काम करने वालों के साथ ही कई ऐसे लोग भी प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री और किराये की दलाली कर रहे हैं, जो बतौर एस्टेट एजेंट पंजीकृत नहीं हैं। इस पर शासन-प्रशासन का कोई प्रभावी नियंत्रण दिखाई नहीं दे रहा है। यह कहना गलत नहीं होगा कि खार पूर्व दलालों के दलदल में फंसता जा रहा है। स्थिति ऐसी बनती जा रही है कि आम आदमी के लिए बिना दलाली के घर लेना या किराये पर घर तलाशना मुश्किल हो गया है। वहीं, कुछ स्थानों पर दलालों और रूम मालिकों की कथित मिलीभगत से किरायेदारों से घर खाली करवाने जैसी शिकायतें भी सामने आती हैं। इतना ही नहीं, अधिक पैसे कमाने की लालच में कुछ रूम मालिक अपनी झोपड़ियां कारखाना चलाने वालों को देकर कमाई कर रहे हैं। इन झोपड़पट्टी इलाकों में बिना आवश्यक अनुमति के कारखाने चलने का भी मामला सामने आ रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि इन कारखानों को संचालित करने की अनुमति किसने दी और संबंधित विभाग इनकी जांच क्यों नहीं कर रहा? सवाल यह भी है कि एस्टेट एजेंट के रूप में काम करने वालों के लिए आखिर नियम-कानून क्या हैं और उनका पालन कौन सुनिश्चित कर रहा है? खार पूर्व के झोपड़पट्टी इलाकों में बिना पंजीकरण दलाली और बिना अनुमति चल रहे कारखानों पर संबंधित विभाग कार्रवाई कब करेगा? स्थानीय प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर ध्यान कब देगा?





