
मुंबई। महाराष्ट्र अन्न व औषध प्रशासन (एफडीए) में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोपों पर राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए सोमवार को मुंबई मंडल में तैनात सहायक आयुक्त (अन्न) भूषण मोरे सहित तीन अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई वर्ष 2024 के चर्चित अहिल्यानगर सुपारी प्रकरण से जुड़ी बताई जा रही है। एफडीए आयुक्त श्रीधर डूबे-पाटिल ने निलंबन की पुष्टि की है। जानकारी के अनुसार, यह सुपारी प्रकरण पिछले दो वर्षों से लंबित था और कार्रवाई में लगातार देरी को लेकर सवाल उठते रहे थे। आरोप है कि मामले को दबाने के प्रयास भी किए गए, लेकिन अब राज्य सरकार ने हस्तक्षेप करते हुए सहायक आयुक्त डॉ. भूषण मोरे के साथ खाद्य सुरक्षा अधिकारी प्रदीप कुटे और राजेश बड़े के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की है।हालांकि सुपारी मामले में दो साल बाद कार्रवाई हुई, लेकिन अब नजरें उन अन्य मामलों पर टिक गई हैं जिनमें पहले से अनियमितताओं और पद के दुरुपयोग के आरोप सामने आते रहे हैं। खासकर गुटखा प्रकरण और भिवंडी में 24 घंटे के भीतर करीब 2.74 करोड़ रुपये के गुटखे को नष्ट किए जाने के मामले में निष्पक्ष और गहन जांच की मांग तेज हो गई है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, कई अन्य फाइलें भी जांच के दायरे में हैं और उम्मीद जताई जा रही है कि निलंबन के बाद इन मामलों में बिना किसी दबाव के पारदर्शी कार्रवाई आगे बढ़ेगी।
सख्त संदेश और नए अधिकारियों के लिए मिसाल
ज्ञात हो कि इस वर्ष विभाग में करीब 200 नए अधिकारियों की नियुक्ति हुई है। ऐसे में राज्य सरकार की यह कार्रवाई एक स्पष्ट और कड़ा संदेश देती है कि नियमों के विरुद्ध किसी भी प्रकार की गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह कदम न केवल विभागीय अनुशासन को मजबूत करेगा, बल्कि नए नियुक्त अधिकारियों के लिए भी एक आदर्श उदाहरण साबित होगा कि पारदर्शिता और ईमानदारी से ही सेवा करना अपेक्षित है।




