
पटना। बिहार में राज्यसभा की एक सीट को लेकर एनडीए के भीतर सियासी खींचतान तेज होती जा रही है। एलजेपीआर प्रमुख चिराग पासवान और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के बाद अब हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (एचएएम) के संरक्षक और केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी ने भी खुलकर अपनी दावेदारी पेश कर दी है। जहानाबाद में एक कार्यक्रम के दौरान मांझी ने दावा किया कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने २०२४ के लोकसभा चुनाव से पहले उनकी पार्टी को दो लोकसभा सीटों और एक राज्यसभा सीट देने का वादा किया था। हालांकि लोकसभा चुनाव में एचएएम को केवल एक सीट ही मिली, लेकिन इसके बावजूद पार्टी एनडीए और खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति पूरी तरह समर्पित रही। जीतनराम मांझी ने कहा कि लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने एक सीट पर ही संतोष कर लिया, लेकिन अब जब राज्यसभा चुनाव की बारी है तो उनकी पार्टी को भी एक सीट मिलनी चाहिए। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उनके बेटे संतोष कुमार सुमन से बात की जा रही है कि राज्यसभा के लिए औपचारिक रूप से एक सीट की मांग रखी जाए। मांझी ने अमित शाह के कथित वादे का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने दो लोकसभा और एक राज्यसभा सीट की बात कही थी, जिसे वे ‘पत्थर की लकीर’ मानते हैं, लेकिन अब तक पूरा लाभ नहीं मिला। उपेंद्र कुशवाहा की दावेदारी पर प्रतिक्रिया देते हुए मांझी ने कहा कि कुशवाहा एक ‘मेच्योर’ नेता हैं और उन्हें पहले ही राजनीतिक लाभ मिल चुका है—वे स्वयं राज्यसभा सांसद हैं, उनकी पत्नी विधायक हैं और बेटे को भी मंत्री बनाया गया है। वहीं अपनी पार्टी की स्थिति पर मांझी ने कहा कि हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा को अभी तक राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा नहीं मिला है, जिससे कई व्यावहारिक दिक्कतें आती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी को कई बार चुनाव आयोग की बैठकों में नहीं बुलाया जाता और चुनाव के दौरान वोटर लिस्ट तक नहीं मिलती, क्योंकि पार्टी को निर्दलीय की तरह ट्रीट किया जाता है। उल्लेखनीय है कि हालिया बिहार विधानसभा चुनाव में हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा ने बेहतर प्रदर्शन किया है। पार्टी ने छह सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से पांच पर जीत हासिल की। पार्टी अध्यक्ष संतोष कुमार सुमन बिहार सरकार में मंत्री हैं, जबकि जीतनराम मांझी गया से सांसद हैं और केंद्र की मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में शामिल हैं। ऐसे में राज्यसभा सीट को लेकर उनकी दावेदारी ने बिहार एनडीए की अंदरूनी राजनीति को और गर्मा दिया है।




