
मीरा-भाईंदर। मीरा-भाईंदर महानगरपालिका चुनाव अब महज़ एक स्थानीय निकाय का चुनाव नहीं रह गया है, बल्कि यह सत्ता, प्रतिष्ठा और राजनीतिक वर्चस्व की निर्णायक लड़ाई में बदल चुका है। इस बार चुनावी मैदान में टकराव भाजपा बनाम शिवसेना से ज़्यादा, परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक और मीरा-भाईंदर के विधायक नरेंद्र मेहता के बीच व्यक्तिगत राजनीतिक संघर्ष के रूप में उभरकर सामने आ रहा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि दोनों नेता एक-दूसरे पर खुले मंच से तीखे आरोप लगाते नज़र आ रहे हैं।
मंत्री प्रताप सरनाईक का तीखा हमला
मंगलवार को आयोजित पत्रकार परिषद में परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने विधायक नरेंद्र मेहता पर सीधा और आक्रामक हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि नरेंद्र मेहता पर कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं और इसकी पुष्टि के लिए उन्होंने विधानसभा चुनाव के दौरान दाखिल किए गए शपथ-पत्र का हवाला दिया। सरनाईक ने कहा कि केंद्र और राज्य में महायुति की सरकार है और ठाणे व वसई-विरार जैसे क्षेत्रों में गठबंधन के तहत चुनाव लड़े जा रहे हैं। इसी तर्ज पर मीरा-भाईंदर मनपा चुनाव में भी युति का प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन विधायक मेहता ने कथित अहंकार के चलते इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। व्यंग्यात्मक लहजे में उन्होंने कहा कि मेहता ने “बजरंगी भाईजान की पूंछ में आग लगा दी है”, जो उनके भ्रष्टाचार की पूरी “लंका” को जला देगी। सरनाईक ने मेट्रो परियोजना, सूर्या जलप्रकल्प और खेल संकुल में एक युवक की मौत जैसे मामलों को उठाते हुए भी विधायक पर गंभीर सवाल खड़े किए।
विधायक नरेंद्र मेहता का करारा पलटवार
सरनाईक के आरोपों के तुरंत बाद विधायक नरेंद्र मेहता ने अलग पत्रकार परिषद कर जोरदार पलटवार किया। उन्होंने कहा कि दूसरों पर उंगली उठाने से पहले मंत्री प्रताप सरनाईक को अपने कार्यों और कथित घोटालों पर नज़र डालनी चाहिए। मेहता ने 2019 के विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए सरनाईक पर विश्वासघात का आरोप लगाया और कहा कि इसी कारण मनपा चुनाव में युति नहीं की गई। उन्होंने टाउन पार्क (शिवार गार्डन), सड़क निर्माण कार्य, कोरोना काल के दौरान कथित खिचड़ी घोटाला और टेंट घोटाले को लेकर भी मंत्री सरनाईक पर गंभीर आरोप लगाए।
विधायक मेहता ने दावा किया कि जनता ने 2024 में एक बार फिर उन पर भरोसा जताया है और वे मीरा-भाईंदर शहर के समग्र और पारदर्शी विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। इस दौरान उन्होंने प्रभाग क्रमांक 8 की एक तस्वीर भी साझा की, जिसमें शिवसेना और कांग्रेस के उम्मीदवार कथित रूप से एक साथ प्रचार करते दिखाई दे रहे हैं। मेहता ने इसे “छुपी हुई युति” बताते हुए मतदाताओं को सतर्क रहने की अपील की। दोनों नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप ने मीरा-भाईंदर मनपा चुनाव को और अधिक तीखा और रोचक बना दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव अब नीतियों और विकास से ज़्यादा व्यक्तियों के टकराव और राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई में तब्दील हो चुका है। आने वाले दिनों में यह सियासी जंग और तेज़ होने के संकेत दे रही है।




