4 आरोपी गिरफ्तार, नाबालिग भी शामिल; 8 बाइक और 24 मोटरसाइकिलों के नंबर प्लेट, इंजन-चेसिस समेत पार्ट्स बरामद

इंद्र यादव/मुंबई। दहिसर पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो बाइक चोरी करने में उस्ताद था। ये लोग सिर्फ बाइक उठाकर गायब नहीं होते थे, बल्कि उसे पार्ट्स में तोड़कर कबाड़ में बेचने तक का पूरा ‘बिजनेस मॉडल’ चला रहे थे। मामला 20 से 21 अगस्त 2026 के बीच का है। दहिसर पूर्व के शिववल्लभ रोड, अशोकवन इलाके से एक फरियादी की हीरो होंडा सुपर स्प्लेंडर (नंबर MH 02 AZ 4549) गायब हो गई। मामले में एफआईआर नंबर 9288/2026 दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू की। सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए, तकनीकी जांच हुई और आखिरकार पुलिस की जांच आनंदनगर, दहिसर तक पहुंच गई। यहां से पुलिस ने रोनीत भास्कर शेट्टी (23), पंकज संजय प्रसाद गुप्ता (20), आशुतोष संतोष दुबे (20) और पिंटू छोटेलाल गुप्ता (29) को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, पिंटू चोरी की मोटरसाइकिलों के पार्ट्स बेचने का काम देखता था। गिरोह के साथ 17 साल 8 महीने का एक नाबालिग भी शामिल पाया गया। पुलिस जब इनके ठिकाने तक पहुंची तो मामला एक बाइक की चोरी से कहीं बड़ा निकला। आरोपियों के पास से 8 मोटरसाइकिलें बरामद की गईं। इसके अलावा 24 मोटरसाइकिलों के नंबर प्लेट, चेसिस, इंजन और अन्य पार्ट्स भी मिले। यानी मामला एक-दो बाइक उठाने तक सीमित नहीं था, यहां तो पूरा ‘स्क्रैप यार्ड’ तैयार था। पुलिस के अनुसार, गिरोह का तरीका भी बड़ा ‘प्रोफेशनल’ था। आरोपी कई दिनों से एक ही स्थान पर खड़ी मोटरसाइकिलों पर नजर रखते थे। मौका मिलते ही बाइक गायब कर देते और फिर उसे किसी ठिकाने पर ले जाकर उसके पार्ट्स अलग कर दिए जाते। इसके बाद इन पार्ट्स को कबाड़ में बेचकर चोरी की बाइक की पहचान मिटाने की कोशिश की जाती थी। मतलब बाइक चोरी करना एक विभाग था, उसे खोलकर टुकड़े-टुकड़े करना दूसरा और पार्ट्स बेचकर पैसा कमाना तीसरा—पूरा उद्योग ही खड़ा कर रखा था! अब सवाल यह भी उठता है कि आरोपी इतने दिनों तक इलाके में खड़ी मोटरसाइकिलों की रेकी करते रहे और किसी को भनक तक कैसे नहीं लगी? क्या आसपास के लोगों ने संदिग्ध गतिविधियों पर ध्यान नहीं दिया या फिर ‘अपनी बाइक सुरक्षित है तो हमें क्या’ वाली सोच हावी रही? खैर, इस बार दहिसर पुलिस ने गिरोह का हिसाब-किताब बिगाड़ दिया। चार आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है, जबकि नाबालिग के मामले में किशोर न्याय कानून के तहत प्रक्रिया अपनाई जा रही है। बरामद 8 मोटरसाइकिलों और 24 अन्य बाइकों से जुड़े नंबर प्लेट, चेसिस, इंजन तथा पार्ट्स की जांच कर उनके असली मालिकों और संबंधित चोरी के मामलों का पता लगाया जा रहा है। अब इस कार्रवाई के बाद बाइक चोरों के लिए संदेश भी साफ है—सड़क से बाइक उठाकर उसे पार्ट्स में बदल देने से पुलिस की फाइल बंद नहीं होती। कभी-कभी चेसिस, इंजन और नंबर प्लेट के टुकड़े भी पूरी कहानी सुना देते हैं।

