
मुंबई। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य की दिशा में महाराष्ट्र तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और मुंबई से गडचिरोली के सुरजागढ़ तक विकास का नया एक्सप्रेसवे तैयार किया जा रहा है। उद्योग, आधुनिक आधारभूत सुविधाएं, तेज़ परिवहन, कौशल विकास, आवास और पर्यावरण-अनुकूल परियोजनाओं के माध्यम से राज्य का सर्वांगीण विकास किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि इन व्यापक विकास योजनाओं के बल पर महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचेगी। ‘दि हिंदू कॉन्क्लेव’ में “मुंबई टू सुरजागढ़ – समृद्धि का महामार्ग” विषय पर बोलते हुए उपमुख्यमंत्री शिंदे ने राज्य के इंफ्रास्ट्रक्चर, उद्योग, आवास, परिवहन, पर्यावरण और गडचिरोली जैसे दूरदराज़ क्षेत्रों के विकास का विस्तृत खाका प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि मुंबई देश की आर्थिक राजधानी है, जबकि गडचिरोली जैसे क्षेत्र प्राकृतिक और औद्योगिक संसाधनों से समृद्ध हैं। सरकार का उद्देश्य विकास को केवल महानगरों तक सीमित न रखते हुए ग्रामीण, आदिवासी और पिछड़े इलाकों तक पहुंचाना है। उन्होंने बताया कि समृद्धि महामार्ग, मेट्रो नेटवर्क, नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा, औद्योगिक कॉरिडोर, स्टील प्रोजेक्ट और कौशल विकास केंद्रों के माध्यम से राज्य में बड़े पैमाने पर रोजगार निर्माण हो रहा है। “कोस्ट टू फॉरेस्ट” विकास मॉडल के जरिए महाराष्ट्र के विभिन्न क्षेत्रों को जोड़ा जा रहा है। गडचिरोली के संदर्भ में उपमुख्यमंत्री शिंदे ने कहा कि पालकमंत्री रहते हुए उन्होंने नक्सल प्रभावित इलाकों में जाकर स्थानीय नागरिकों, आदिवासियों और पुलिस प्रशासन के साथ संवाद स्थापित किया। उन्होंने कहा कि किसी भी दुर्गम क्षेत्र का विकास तभी संभव है जब वहां के समाज के साथ भावनात्मक जुड़ाव बनाया जाए। उन्होंने बताया कि रक्षाबंधन और दिवाली जैसे त्योहार भी उन्होंने जवानों के साथ गडचिरोली में मनाए। उन्होंने कहा कि गडचिरोली में सड़कें, पुल, एंबुलेंस, ऑक्सीजन प्लांट और प्रशासनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं। लेकिन सरकार का लक्ष्य केवल आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उद्योग और रोजगार निर्माण के जरिए स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है।
टाटा समूह के सहयोग से गडचिरोली में 170 करोड़ रुपये की लागत से “टाटा टेक्नोलॉजी स्किल डेवलपमेंट सेंटर” स्थापित किया गया है, जहां हर साल लगभग 4,800 युवाओं को अत्याधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर मिलेंगे। उपमुख्यमंत्री शिंदे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व में नक्सलवाद पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हुआ है, जिसके कारण गडचिरोली जैसे क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति मिली है। उन्होंने बताया कि कोनसरी में लॉयड्स मेटल्स एंड एनर्जी लिमिटेड के साथ 20 हजार करोड़ रुपये के इंटीग्रेटेड स्टील प्लांट के लिए समझौता किया गया है, जिससे लगभग 10 हजार रोजगार सृजित होंगे। वहीं सुरजागढ़ इस्पात परियोजना के तहत भी 20 हजार करोड़ रुपये का निवेश होगा, जिससे 8 हजार युवाओं को रोजगार मिलेगा। सुरजागढ़ क्षेत्र की खनिज ढुलाई के लिए 85 किलोमीटर लंबा ग्रीनफील्ड रोड प्रोजेक्ट मंजूर किया गया है, जिसे समृद्धि महामार्ग से जोड़ा जाएगा। इसके बाद मुंबई से गडचिरोली की यात्रा 9 से 10 घंटे में पूरी की जा सकेगी। साथ ही गडचिरोली में नए हवाईअड्डे को भी मंजूरी दी गई है।
उन्होंने बताया कि ‘डिस्ट्रिक्ट इन्वेस्टमेंट समिट-2025’ के दौरान 12 कंपनियों के साथ हुए समझौतों के जरिए 17,431 करोड़ रुपये का निवेश और लगभग 1.44 लाख रोजगार सृजित होंगे। मुंबई और एमएमआर क्षेत्र को वैश्विक आर्थिक केंद्र बनाने की दिशा में राज्य सरकार तेज़ी से काम कर रही है। नीति आयोग के रोडमैप के आधार पर मुंबई का जीडीपी दोगुना करने और उसे “ग्लोबल फिनटेक कैपिटल” बनाने की दिशा में कई प्रकल्प शुरू किए गए हैं। एमएमआर क्षेत्र में करीब 4 लाख करोड़ रुपये की आधारभूत परियोजनाओं पर काम चल रहा है, जिनमें अटल सेतु, कोस्टल रोड, बुलेट ट्रेन, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, मेट्रो लाइन-3 और बढ़वण बंदरगाह जैसे प्रकल्प शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य “60 मिनट की मुंबई” बनाना है, ताकि शहर के एक छोर से दूसरे छोर तक एक घंटे में पहुंचा जा सके। इसके लिए 337 किलोमीटर लंबा मेट्रो नेटवर्क विकसित किया जा रहा है। उपमुख्यमंत्री शिंदे ने बताया कि कल्याण को लॉजिस्टिक्स हब, डोंबिवली को नॉलेज और सर्विस सेक्टर हब, अंबरनाथ को औद्योगिक और एमएसएमई हब तथा बदलापुर को सतत शहरी विकास मॉडल के रूप में विकसित किया जा रहा है। गृहनिर्माण क्षेत्र में बड़े बदलावों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि मुंबई में 12 लाख और एमएमआर में 20 लाख घरों की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए 17 वर्षों बाद नई हाउसिंग पॉलिसी लागू की गई है। “माय होम – माय राइट” योजना के तहत 2030 तक आर्थिक रूप से कमजोर और निम्न आय वर्ग के लिए 35 लाख घर बनाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि एआई आधारित डिजिटल हाउसिंग पोर्टल तैयार किया जा रहा है, जिसमें जियो-टैगिंग, लैंड बैंक, महारेरा, महाभूलेख और पीएम गतिशक्ति का एकीकरण होगा। साथ ही क्लस्टर रीडेवलपमेंट और स्लम पुनर्विकास को प्राथमिकता दी जा रही है। धारावी पुनर्विकास परियोजना का उल्लेख करते हुए उपमुख्यमंत्री शिंदे ने कहा कि यह दुनिया की सबसे बड़ी आधुनिक पुनर्विकास परियोजनाओं में से एक होगी। पात्र और अपात्र निवासियों के लिए अलग-अलग आवास योजनाएं लागू की जाएंगी। पर्यावरण संरक्षण के संदर्भ में उन्होंने कहा कि समृद्धि महामार्ग, कोस्टल रोड, मुंबई-पुणे मिसिंग लिंक और ठाणे-बोरीवली टनल जैसे प्रकल्पों में पर्यावरणीय मानकों का कड़ाई से पालन किया गया है। महालक्ष्मी रेसकोर्स में 295 एकड़ का सेंट्रल पार्क और ठाणे में 25 एकड़ का “नमो ग्रैंड सेंट्रल पार्क” विकसित किया जा रहा है। इसके अलावा राज्यभर में 394 “नमो गार्डन्स” बनाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज, पंपिंग स्टेशन, आईफ्लोज सिस्टम, डिवॉटरिंग पंप और मिठी नदी सुधार परियोजनाओं पर भी तेजी से काम किया जा रहा है। अंत में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि महाराष्ट्र का विकास मॉडल संतुलित और सर्वसमावेशक है, जिसमें मुंबई जैसे आर्थिक केंद्रों के साथ गडचिरोली जैसे दूरस्थ क्षेत्रों को भी उद्योग, रोजगार, शिक्षा और आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने का काम किया जा रहा है।



