
नई दिल्ल। महाराष्ट्र के अकोला जिले के मोरगांव भाकरे निवासी और महार रेजिमेंट की प्रथम बटालियन तथा राष्ट्रीय राइफल्स के जवान प्रवीण प्रभाकर जंजाल को कश्मीर घाटी में आतंकवादियों के खिलाफ अभियान के दौरान प्रदर्शित असाधारण वीरता और सर्वोच्च बलिदान के लिए मरणोपरांत ‘कीर्ति चक्र’ से सम्मानित किया गया। मंगलवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित विशेष ‘रक्षा अलंकरण’ समारोह में यह सम्मान प्रदान किया। शहीद जवान की ओर से उनकी पत्नी श्यामबाला जंजाल और माता शाहू प्रभाकर जंजाल ने यह प्रतिष्ठित पुरस्कार ग्रहण किया। समारोह में उपराष्ट्रपति सी.पी.राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
आतंकियों की मौजूदगी का पता चलते ही साथियों को किया सतर्क
जानकारी के अनुसार, 6 जुलाई 2024 को कश्मीर घाटी में चलाए जा रहे एक तलाशी अभियान के दौरान शिपाई प्रवीण जंजाल अपनी टीम के साथ ऑपरेशन में तैनात थे। अभियान के दौरान उन्हें संदिग्ध गतिविधियां दिखाई दीं, जिसके बाद उन्होंने तुरंत अपने साथियों को सतर्क किया। इसी बीच छिपे हुए आतंकवादियों ने भागने के उद्देश्य से अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। अत्यंत चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद प्रवीण जंजाल ने असाधारण साहस और सूझबूझ का परिचय देते हुए आतंकवादियों का पीछा किया और मोर्चा संभाले रखा।
गंभीर रूप से घायल होने के बाद भी लड़ते रहे, दो आतंकियों को किया ढेर
मुठभेड़ के दौरान प्रवीण जंजाल ने अपने सटीक निशाने से दो कुख्यात आतंकवादियों को मार गिराया। इसी दौरान उनके सिर में गोली लगने से वे गंभीर रूप से घायल हो गए। गंभीर चोट लगने के बावजूद उन्होंने अंतिम क्षण तक संघर्ष जारी रखा और मातृभूमि की रक्षा करते हुए वीरगति प्राप्त की। उनके अद्वितीय साहस, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रसेवा के सर्वोच्च बलिदान को सम्मानित करते हुए भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरांत कीर्ति चक्र प्रदान करने की घोषणा की थी। यह सम्मान देश के प्रति उनकी अमिट निष्ठा और अदम्य वीरता का प्रतीक माना जा रहा है।



