
मुंबई। भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के पश्चिमी क्षेत्रीय कार्यालय की ओर से मंगलवार को अंधेरी (पूर्व) स्थित सीप्झ के भारत रत्नम मेगा कॉमन फैसिलिटी सेंटर (सीएफसी) में बीआईएस का स्थापना दिवस मनाया गया। इस अवसर पर “मानकों के माध्यम से भारत में गुणवत्ता पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करना” विषय पर एक महत्वपूर्ण उद्योग बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें उद्योग, शिक्षा जगत और मानक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत बीआईएस पश्चिमी क्षेत्र के उप महानिदेशक वी. गोपीनाथ के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने प्रभावी मानकीकरण, प्रमाणन और हितधारकों की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से देश की गुणवत्ता अवसंरचना को मजबूत बनाने में बीआईएस की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मानकों के विकास और उनके प्रभावी क्रियान्वयन में उद्योग की सहभागिता अत्यंत आवश्यक है, तभी गुणवत्ता आधारित विकास को गति दी जा सकती है। आईआईटी बॉम्बे के उप निदेशक प्रो. मिलिंद अत्रे ने मुख्य अतिथि के रूप में उद्घाटन संबोधन दिया। उन्होंने तकनीकी प्रगति, नवाचार और सतत विकास को आगे बढ़ाने में मानकों की अहम भूमिका को रेखांकित किया। साथ ही, भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए शिक्षा जगत, उद्योग और मानक संस्थाओं के बीच मजबूत सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम में उपभोक्ता परिसंघ भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनंत शर्मा, बॉम्बे मेटल एक्सचेंज के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं बीआईएस कार्यकारी परिषद सदस्य महेंद्र मेहता तथा अखिल भारतीय खिलौना निर्माता संघ के अध्यक्ष शब्बीर गबाजीवाला विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने गुणवत्ता अनुपालन, उभरते बाजारों की चुनौतियों, नई तकनीकों और उपभोक्ता संरक्षण के संदर्भ में बीआईएस के साथ उद्योग की निरंतर सहभागिता को आवश्यक बताया। इस अवसर पर बीआईएस की प्रमुख गतिविधियों और भविष्य की दिशा पर केंद्रित तकनीकी सत्रों का भी आयोजन किया गया। बीआईएस के वैज्ञानिक एफ. प्रवीण कुमार ने हॉलमार्किंग योजना पर प्रस्तुति देते हुए सोने और चांदी के आभूषणों की खरीद में उपभोक्ता संरक्षण, पारदर्शिता और विश्वास के महत्व को समझाया। उन्होंने बताया कि हॉलमार्किंग प्रणाली उपभोक्ताओं को शुद्धता और गुणवत्ता का भरोसा दिलाने का एक सशक्त माध्यम है। पूरे कार्यक्रम के दौरान इस बात पर सहमति जताई गई कि मजबूत मानक, प्रभावी अनुपालन और सभी हितधारकों के सहयोग से ही भारत में एक सुदृढ़ गुणवत्ता पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया जा सकता है, जो ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।




