Monday, April 27, 2026
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गुरुभक्ति में डूबेगा ठाणे, 19 जुलाई को होगा आचार्य चंद्रानन सागर सूरिश्वरजी का भव्य आगमन

दिनेश चंद्र रावल/ठाणे। ठाणे की पुण्यधरा पर आस्था, भक्ति और संयम का अद्वितीय संगम होने जा रहा है, जिसकी गूंज लंबे समय तक श्रद्धालुओं के मानस पटल पर अंकित रहेगी। श्री राजस्थान श्वेतांबर मूर्तिपूजक जैन संघ एवं श्री ऋषभदेवजी महाराज जैन धर्म टेंपल ऐंड ज्ञाति ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित इस वर्ष का चातुर्मास केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्म-कल्याण और शासन प्रभावना का एक महाकुंभ सिद्ध होने जा रहा है। इस पावन अवसर के केंद्र में हैं आचार्य श्री चंद्रानन सागर सूरिश्वरजी, जो कोकण शत्रुंजय स्वरूप ठाणा नगरी में 258 जिनालयों के प्रतिष्ठाकारक और नाकोडा भैरव दर्शन धाम के दूरदर्शी संस्थापक के रूप में विख्यात हैं।आगामी आषाढ़ सुद 6, दिनांक 19 जुलाई 2026 (रविवार) का दिन ठाणे के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज होने जा रहा है। प्रातःकालीन बेला में जब सूर्य की पहली किरणें धरती को स्पर्श करेंगी, तब हजारों गुरुभक्तों की उपस्थिति, ढोल-नगाड़ों की गूंज और “गुरुदेव” के जयघोष के बीच आचार्य भगवंत का भव्य मंगल प्रवेश होगा। इस आध्यात्मिक यात्रा में प्रवर्तक मुनिराज श्री हरिशचंद्र सागरजी म.सा., तपस्वी मुनिराज श्री जैनेशचंद्र सागरजी म.सा. तथा मुनिराज श्री मननचंद्र सागरजी म.सा. सहित अन्य मुनिवृंद का सान्निध्य प्राप्त होगा। साथ ही विदुषी साध्वीजी श्री कल्पिताश्रीजी म.सा. एवं साध्वीजी श्री चारुताश्रीजी म.सा. सहित श्रमण-श्रमणीवृंद की उपस्थिति इस चातुर्मास को ज्ञान, साधना और वैराग्य की त्रिवेणी बना देगी।इस ऐतिहासिक चातुर्मास को भव्य और अभूतपूर्व बनाने के लिए संघ के पदाधिकारी दिन-रात तैयारियों में जुटे हुए हैं। संघ के अध्यक्ष उत्तमचंद यू. सोलंकी एवं मैनेजिंग ट्रस्टी उदय एम. परमार के मार्गदर्शन में आयोजन को भव्य स्वरूप दिया जा रहा है। उपमैनेजिंग ट्रस्टी सुकनराज परमार, सेक्रेटरी सुरेश जे. गुंगलिया, उपसेक्रेटरी गुणवंत एम. सालेचा, कोषाध्यक्ष अशोक एस. पारेख, उपकोषाध्यक्ष प्रवीण के. राठौड़, ट्रस्टीगण महिपाल एस. मंडेशा, रमेश के. ढेलरिया वोरा, महावीर डी. पुनमिया, संपतराज डी. कंकूचोपड़ा, राजू डी. मेहता सहित समस्त कार्यकारिणी एवं विभिन्न मंडल पूर्ण समर्पण और सेवा भाव से कार्य कर रहे हैं।यह चातुर्मास ठाणे नगर के लिए केवल धार्मिक प्रवचनों का अवसर नहीं, बल्कि तप, जप और साधना के माध्यम से आत्मोन्नति का भी विशेष काल होगा। आचार्य भगवंत की ओजस्वी वाणी और मुनिराजों का संयमित जीवन समाज के हर वर्ग को धर्ममार्ग की ओर प्रेरित करेगा। 19 जुलाई का दिन अत्यंत रोमांचक होगा, जब संपूर्ण ठाणे नगरी श्वेत वस्त्रधारी श्रावक-श्राविकाओं से आच्छादित होगी और गुरुदेव के चरणों से यह भूमि पावन बनेगी। श्रद्धालुओं से इस ऐतिहासिक अवसर के साक्षी बनने और धर्मलाभ प्राप्त करने का आग्रह किया गया है।

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