पुणे की अर्थव्यवस्था 2036 तक 220 अरब डॉलर करने का लक्ष्य, ₹10 लाख करोड़ तक निवेश की योजना

‘पुणे ग्रोथ हब’ में 58 प्राथमिक परियोजनाएं, 15 से 20 लाख अतिरिक्त रोजगार, 250 किमी मेट्रो नेटवर्क और 4 से 5 लाख किफायती घर बनाने की योजना

मुंबई। नीति आयोग के ‘ग्रोथ हब’ उपक्रम के तहत पुणे आर्थिक क्षेत्र के सर्वांगीण विकास का व्यापक खाका तैयार किया गया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की उपस्थिति में सोमवार को सह्याद्री अतिथि गृह में इस महत्वाकांक्षी योजना का प्रस्तुतीकरण किया गया। योजना के तहत पुणे आर्थिक क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को वर्ष 2036 तक 200 से 220 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए 58 प्राथमिक परियोजनाएं, करीब ₹9 से ₹10 लाख करोड़ का निवेश और लगभग 15 से 20 लाख अतिरिक्त रोजगार सृजित करने की योजना है। पुणे ग्रोथ हब योजना में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने, किफायती आवास उपलब्ध कराने, रोजगार बढ़ाने, नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार और पर्यावरण संरक्षण को प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किया गया है। सह्याद्री अतिथि गृह में आयोजित बैठक में राज्यमंत्री माधुरी मिसाल, मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल, महाराष्ट्र वित्त आयोग के अध्यक्ष नितीन करीर सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। आईएसईजी के प्रबंध निदेशक शिरीष सांख्ये और मैकेंजी के रौनक शाह ने योजना का प्रस्तुतीकरण किया। नीति आयोग के ‘ग्रोथ हब’ उपक्रम के अंतर्गत पुणे आर्थिक क्षेत्र के विकास की प्रक्रिया 1 अगस्त 2025 को शुरू हुई थी। नीति आयोग, महाराष्ट्र सरकार और पुणे इंटरनेशनल सेंटर की सहभागिता से तैयार योजना में पुणे महानगरपालिका, पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका और पुणे महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण (PMRDA) के कार्यक्षेत्र को शामिल किया गया है।
विकास दर 10 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य
राज्य की आय में पुणे की हिस्सेदारी करीब 11 से 12 प्रतिशत है। पुणे की मौजूदा वास्तविक आर्थिक विकास दर 6 से 6.5 प्रतिशत बताई गई है, जिसे बढ़ाकर 10 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य है। पुणे आर्थिक क्षेत्र की अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2025-26 के करीब 68 अरब डॉलर से बढ़ाकर 2035-36 तक 200 से 220 अरब डॉलर करने का प्रस्ताव है। यह योजना महाराष्ट्र को 2047 तक पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य से भी जोड़ी गई है। पुणे आर्थिक क्षेत्र में वर्तमान में करीब डेढ़ करोड़ लोगों के रहने का अनुमान है। योजना का उद्देश्य आर्थिक विकास का लाभ आम नागरिकों तक पहुंचाने के साथ पुणे को एशिया के सर्वाधिक रहने योग्य क्षेत्रों में शामिल करना है।
EV, ड्रोन, रोबोटिक्स और सेमीकंडक्टर का बनेगा बड़ा केंद्र
उच्च तकनीक उत्पादन के लिए वाहन एवं इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण, इंजीनियरिंग उत्पाद, रक्षा, रोबोटिक्स एवं ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सेमीकंडक्टर तथा जैव प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है। पुणे क्षेत्र में इलेक्ट्रिक व्हीकल एवं फ्यूचर मोबिलिटी सेंटर, हाईटेक इंजीनियरिंग पार्क, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा प्रौद्योगिकी एवं रोबोटिक्स उत्पादन केंद्र, आईटी, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस केंद्र प्रस्तावित किए गए हैं। इन क्षेत्रों से करीब 4 से 5 लाख अतिरिक्त रोजगार पैदा होने की क्षमता आंकी गई है। स्टार्टअप की संख्या 10 हजार से अधिक करने के साथ डेढ़ से दो लाख तकनीकी पेशेवरों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में पुनः कौशल प्रशिक्षण देने की योजना भी है।
रोजगार 56 लाख से बढ़ाकर 74 से 76 लाख करने की तैयारी
पुणे आर्थिक क्षेत्र में फिलहाल करीब 56 लाख रोजगार होने का अनुमान है। अगले दस वर्षों में रोजगार की संख्या बढ़ाकर करीब 74 से 76 लाख करने का लक्ष्य है। इसके तहत उत्पादन, सेवा, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन, कृषि प्रसंस्करण और परिवहन सहित विभिन्न क्षेत्रों में 12 से 20 लाख अतिरिक्त रोजगार सृजित करने की योजना है।
शिवनेरी से सिंहगढ़ तक किला सर्किट, 600 किमी का ट्रेकिंग मार्ग
पर्यटन के क्षेत्र में पुणे आर्थिक क्षेत्र को देश के शीर्ष दस पर्यटन स्थलों में स्थान दिलाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए किला एवं झील सर्किट, खेल एवं साहसिक पर्यटन, स्वास्थ्य एवं विवाह पर्यटन, कार्यक्रम पर्यटन, वन्यजीव पर्यटन और धार्मिक-सांस्कृतिक पर्यटन पर विशेष जोर दिया जाएगा। शिवनेरी, लोहगढ़, राजगढ़ और सिंहगढ़ को जोड़ने वाला छत्रपति शिवाजी महाराज किला सर्किट, पवना एवं भाटघर जल पर्यटन केंद्र, 600 किलोमीटर का सह्याद्री ओपन ट्रेकिंग मार्ग, स्वास्थ्य पर्यटन क्षेत्र, PIECC कार्यक्रम एवं मनोरंजन केंद्र तथा जुन्नर लेपर्ड सफारी प्रमुख प्रस्तावों में शामिल हैं।
250 किमी मेट्रो, 14 हजार बस और छह मल्टी-मॉडल हब
पुणे में सार्वजनिक परिवहन की हिस्सेदारी को मौजूदा 13 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए 11 रेलवे परियोजनाएं, 13 सड़क परियोजनाएं, 250 किलोमीटर का मेट्रो नेटवर्क, 12 से 14 हजार बसें और छह मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब प्रस्तावित हैं। योजना का लक्ष्य है कि पुणे आर्थिक क्षेत्र में प्रतिदिन होने वाली कुल यात्राओं में कम से कम 50 प्रतिशत यात्रा सार्वजनिक परिवहन के माध्यम से हो। इससे निजी वाहनों पर निर्भरता कम करने और नागरिकों को बेहतर परिवहन विकल्प उपलब्ध कराने की योजना है।
2036 तक 90 प्रतिशत पात्र झोपड़ीधारकों का पुनर्वास
झोपड़पट्टियों के पुनर्विकास और पात्र परिवारों के पुनर्वास को भी योजना में प्रमुख स्थान दिया गया है। वर्ष 2036 तक करीब 90 प्रतिशत पात्र झोपड़ीधारक परिवारों के पुनर्वास का लक्ष्य है। अलग-अलग आय वर्ग, औद्योगिक कामगारों, विद्यार्थियों और तकनीकी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए 4 से 5 लाख किफायती आवास बनाने की योजना है। इनमें करीब एक लाख कामगार आवास भी शामिल होंगे। घनी आबादी वाले क्षेत्रों में क्लस्टर पुनर्विकास का प्रस्ताव भी रखा गया है।
कृषि और फूड प्रोसेसिंग कारोबार दोगुना करने का लक्ष्य
अंगूर, केला, अनार, अंजीर और स्ट्रॉबेरी जैसी बागवानी फसलों के साथ डेयरी, खाद्य प्रसंस्करण, कोल्ड स्टोरेज और जैव ईंधन परियोजनाओं को ग्रामीण अर्थव्यवस्था के प्रमुख आधार के रूप में विकसित किया जाएगा। कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के सकल मूल्यवर्धन को मौजूदा करीब 5 अरब डॉलर से बढ़ाकर 10 से 12 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। अलग-अलग क्षेत्रों में प्रसंस्करण उद्योग, कोल्ड चेन और उससे जुड़ी सुविधाएं कहां स्थापित की जाएंगी, इसका भी क्षेत्रवार नियोजन किया गया है।
रोजाना 200 मिलियन लीटर अतिरिक्त पानी की जरूरत
पुणे क्षेत्र को करीब 200 मिलियन लीटर प्रतिदिन अतिरिक्त पानी की आवश्यकता का अनुमान लगाया गया है। इसके लिए मुलशी से सात TMC पानी, भामा घाटी से बड़े पैमाने पर जलापूर्ति, पानी का पुनः उपयोग, बेहतर वितरण व्यवस्था और जलाशयों से गाद निकालने सहित विभिन्न उपाय प्रस्तावित किए गए हैं।
महिलाओं और युवाओं के लिए कौशल विकास
महिलाओं और युवाओं के लिए रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कौशल विकास कार्यक्रम, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों और विश्वविद्यालयों में पाठ्यक्रमों का विस्तार प्रस्तावित है। इलेक्ट्रिक वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स, रोबोटिक्स और जैव प्रौद्योगिकी जैसे उभरते क्षेत्रों में प्रशिक्षण तथा शिक्षा के अवसर बढ़ाने के साथ महिलाओं की रोजगार में भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर रहेगा। योजना में सेमीकंडक्टर, औद्योगिक कामगार आवास और ग्रामीण-शहरी संक्रमण के लिए नई नीतियों के साथ MSME, इंटीग्रेटेड टाउनशिप, पर्यटन, क्लस्टर पुनर्विकास, स्वायत्त औद्योगिक टाउनशिप, निजी औद्योगिक पार्क, स्टार्टअप, झोपड़पट्टी पुनर्विकास और चालक रहित बस संचालन से जुड़े नीतिगत सुधार भी प्रस्तावित किए गए हैं। योजना के क्रियान्वयन के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में नियामक परिषद, मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य संचालन समिति, पुणे ग्रोथ हब संचालन समिति और PMRDA के अंतर्गत परियोजना प्रबंधन कक्ष स्थापित करने का प्रस्ताव है।

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