डोंबिवली अस्पताल मारपीट मामला: शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे की जमानत रद्द, तीन दिन में सरेंडर का आदेश

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी— ‘साफ संदेश जाना चाहिए कि मेडिकल बिरादरी को छुआ नहीं जा सकता’; शास्त्री नगर अस्पताल में डॉक्टरों-कर्मचारियों से कथित मारपीट का मामला

डोंबिवली। डोंबिवली के शास्त्री नगर महानगरपालिका अस्पताल में डॉक्टरों और चिकित्सा कर्मचारियों के साथ कथित मारपीट के मामले में शिवसेना पार्षद रमेश सुखऱ्या म्हात्रे को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा म्हात्रे को दी गई जमानत रद्द कर दी और उन्हें तीन दिन के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने महाराष्ट्र सरकार की ओर से जमानत के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई करते हुए चिकित्सा पेशेवरों की सुरक्षा को लेकर कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि साफ और मजबूत संदेश जाना चाहिए कि “मेडिकल बिरादरी को छुआ नहीं जा सकता। वे लोगों की सेवा करते हैं और उन पर इस तरह हमला नहीं किया जा सकता।मामला 6 जुलाई 2026 का है। डोंबिवली के कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका संचालित शास्त्री नगर अस्पताल में एक गर्भवती महिला के इलाज को लेकर विवाद हुआ था। आरोप है कि इसके बाद म्हात्रे और अन्य लोगों ने अस्पताल के डॉक्टरों तथा कर्मचारियों के साथ मारपीट की। पुलिस ने घटना के दो दिन बाद म्हात्रे को गिरफ्तार किया था। म्हात्रे को 14 जुलाई को निचली अदालत से जमानत मिली थी। इसके बाद बॉम्बे हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए 18 जुलाई को जमानत आदेश पर रोक लगा दी थी। बाद में 7 अगस्त को हाई कोर्ट ने कड़ी शर्तों के साथ म्हात्रे को जमानत दे दी और मुकदमे की सुनवाई तेजी से पूरी करने का निर्देश दिया। इसके बाद महाराष्ट्र सरकार ने म्हात्रे की जमानत रद्द कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। सोमवार की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की अपील पर म्हात्रे को मिली राहत समाप्त करते हुए तीन दिन में सरेंडर करने को कहा। सुनवाई के दौरान अदालत के सामने म्हात्रे से जुड़े पुराने आपराधिक मामलों का मुद्दा भी आया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मौजूदा मामले सहित उनके खिलाफ 19 मामले होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि म्हात्रे की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि पुराने मामले राजनीतिक रूप से प्रेरित थे और उनमें से 18 मामलों में वह बरी हो चुके हैं। शास्त्री नगर अस्पताल की घटना के बाद डॉक्टरों की सुरक्षा का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा था। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद म्हात्रे को तीन दिन के भीतर आत्मसमर्पण करना होगा। मामले में आरोपों की अंतिम सत्यता का फैसला ट्रायल कोर्ट में साक्ष्यों और गवाहियों के आधार पर होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *