महाराष्ट्र के दो-तिहाई इलाके पर सूखे का असर, हालात का जायजा लेने आएगी केंद्रीय टीम
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी करेंगे प्रभावित राज्यों का दौरा, रबी सीजन में पानी की उपलब्धता देखकर फसल चुनने की सलाह

नई दिल्ली। महाराष्ट्र में सूखे की गंभीर स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने जमीनी हालात का प्रत्यक्ष आकलन करने के लिए केंद्रीय टीम भेजने का फैसला किया है। सोमवार को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि महाराष्ट्र का करीब दो-तिहाई इलाका प्रभावित है और राज्य स्तर पर सूखा घोषित किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय टीम महाराष्ट्र में स्थिति का जायजा लेगी और वे स्वयं भी अपनी टीम के साथ प्रभावित राज्यों का दौरा करेंगे।
दिल्ली के पूसा स्थित भारत रत्न सी. सुब्रमण्यम सभागार में आयोजित दो दिवसीय ‘राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन–रबी अभियान 2026’ के उद्घाटन सत्र में चौहान ने राज्यों से रबी सीजन की तैयारियां वैज्ञानिक योजना, बेहतर समन्वय और जमीनी निगरानी के साथ करने को कहा। सम्मेलन में केंद्र और राज्यों के वरिष्ठ कृषि अधिकारी, कृषि विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि और कृषि वैज्ञानिक शामिल हुए।
पानी की उपलब्धता देखकर करें रबी फसलों की बुवाई
चौहान ने रबी की तैयारियों में ‘जल बजट’ को सबसे महत्वपूर्ण मानते हुए कहा कि प्रत्येक राज्य और जिले को पहले यह आकलन करना चाहिए कि सिंचाई के लिए कितना पानी उपलब्ध है। जिन क्षेत्रों में पानी की कमी है, वहां कम पानी की जरूरत वाली दलहन और तिलहन फसलों को प्राथमिकता दी जाए। मिट्टी में मौजूद नमी और सिंचाई की उपलब्धता को ध्यान में रखकर ही फसल का चयन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों के सूखा प्रभावित इलाकों में रेनफेड और सिंचित क्षेत्रों के लिए अलग-अलग योजना बनानी होगी। समय पर बुवाई नहीं होने से अंकुरण और उत्पादन प्रभावित हो सकता है, इसलिए बीज, पानी और अन्य आवश्यक संसाधनों की तैयारी पहले से पूरी रखने को कहा गया है।
धान के बाद खाली खेतों में चना, मसूर और सरसों पर जोर
धान की कटाई के बाद खाली रहने वाले खेतों में दलहन और तिलहन की खेती बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है। राज्यों से रबी में चना, मसूर और सरसों जैसी फसलों के लिए क्षेत्रवार योजना तैयार करने को कहा गया है। इसके साथ किसानों की उपज की समय पर खरीद सुनिश्चित करने के लिए बाजार व्यवस्था भी पहले से तैयार रखने की जरूरत बताई गई है।
रबी में भी चलेगा ‘खेत बचाओ अभियान’
उर्वरकों के संतुलित इस्तेमाल के लिए खरीफ के दौरान चलाए गए ‘खेत बचाओ अभियान’ को रबी सीजन में भी जारी रखने पर जोर दिया गया है। चौहान ने कहा कि जरूरत से ज्यादा खाद डालने से किसानों की लागत बढ़ने के साथ मिट्टी पर भी असर पड़ता है। राज्यों को वैज्ञानिकों की मदद से किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के लिए जागरूक करने को कहा गया है।
किसानों तक योजनाओं और वित्तीय सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए फार्मर आईडी, एग्रीस्टैक और किसान क्रेडिट कार्ड का दायरा बढ़ाने की बात भी कही गई। खासकर छोटे और सीमांत किसानों तक किसान क्रेडिट कार्ड पहुंचाने तथा बैंक स्तर पर ऋण स्वीकृति में आने वाली समस्याओं की पहचान करने को कहा गया है।
हर सप्ताह होगी फसल, रोग और बाजार भाव की समीक्षा
रबी सीजन के दौरान राज्यों को हर सप्ताह बुवाई की प्रगति, फसल की स्थिति, अंकुरण, रोगों के प्रकोप और बाजार भाव की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी समस्या का समय रहते पता लगाकर आवश्यक कदम उठाए जा सकें। केंद्रीय स्तर पर भी साप्ताहिक समीक्षा की व्यवस्था की गई है। सम्मेलन के दूसरे दिन 29 सितंबर को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ विस्तृत चर्चा होगी। इसमें मौसम पूर्वानुमान, उर्वरकों की उपलब्धता, डिजिटल कृषि मिशन, किसान रजिस्ट्री, दलहन एवं खाद्य तेल मिशन, कृषि विपणन सुधार और रबी सीजन की तैयारियों पर चर्चा कर समन्वित कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
