पुणे में MPSC के खिलाफ छात्रों का आंदोलन तेज, राज ठाकरे बोले— ‘मराठी युवाओं को नौकरी दिलाने के लिए किसी के भी पैर पकड़ने पड़े तो तैयार हूं’
आयोग अध्यक्ष के इस्तीफे पर अड़े प्रदर्शनकारी, राज ठाकरे ने कहा— सरकार को दबाव की ताकत समझ में आनी चाहिए

पुणे। महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (MPSC) के कथित अनियमित कामकाज और पेपर लीक के मामलों को लेकर पुणे में हजारों प्रतियोगी छात्र आंदोलन कर रहे हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा छात्र प्रतिनिधिमंडल से चर्चा और विभिन्न आश्वासनों के बावजूद प्रदर्शनकारी अब MPSC अध्यक्ष के इस्तीफे की मांग पर अड़ गए हैं। सोमवार को मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे आंदोलन स्थल पहुंचे और छात्रों से संवाद करते हुए उनके आंदोलन को समर्थन दिया। राज ठाकरे ने कहा कि महाराष्ट्र के युवक-युवतियों को रोजगार दिलाने के लिए उन्हें किसी के भी पैर पकड़ने पड़े तो वह इसके लिए भी तैयार हैं। उन्होंने छात्रों से कहा- मैं आज आपके गुस्से में शामिल होने आया हूं। सरकारी व्यवस्था की वजह से जिंदगी का महत्वपूर्ण समय कैसे निकल जाता है, इस दर्द को मैं समझता हूं। आंदोलन के बीच ड्रग्स इंस्पेक्टर परीक्षा के पेपर लीक मामले में जिम्मेदार ठहराते हुए राज्य लोकसेवा आयोग के सचिव महेंद्र हरपालकर को पद से हटाया गया है। इसके बावजूद छात्रों ने स्पष्ट किया है कि आयोग के अध्यक्ष के इस्तीफे के बिना आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे। आंदोलनकारी छात्रों के प्रतिनिधिमंडल ने वरिष्ठ नेता शरद पवार से भी मुलाकात कर अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा है। राज ठाकरे ने अपने संबोधन में चुनावी व्यवस्था पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा- आपके यहां पेपर फूट रहे हैं, हमारे यहां वोट फूट रहे हैं। उन्होंने चुनावों में वोट चोरी और मतपत्रों से जुड़ी गड़बड़ियों के आरोप लगाते हुए कहा कि जिस तरह प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रक्रिया में युवाओं के जीवन के महत्वपूर्ण वर्ष निकल जाते हैं, उसी तरह राजनीति में भी पांच-पांच साल निकल जाते हैं। उन्होंने छात्रों से जाति-पाति के विवादों में नहीं पड़ने की अपील करते हुए कहा कि युवाओं का ध्यान रोजगार, परीक्षा और भविष्य से जुड़े वास्तविक मुद्दों से नहीं भटकना चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्र अपने भीतर पैदा हुए गुस्से और दबाव को बनाए रखें, ताकि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से निर्णय लेने के लिए मजबूर हो।
‘70 हजार पदों की भर्ती का दावा व्यावहारिक नहीं’
छात्रों की 70 हजार पदों पर भर्ती की मांग पर राज ठाकरे ने कहा कि वह ऐसी बात नहीं कहना चाहते जो वास्तविकता से दूर हो। उनके मुताबिक सरकार बदलने के बाद भी एक साथ 70 हजार पदों पर भर्ती की मांग पूरी होना संभव नहीं दिखाई देता। हालांकि उन्होंने जोर देकर कहा कि युवाओं को रोजगार मिलना ही चाहिए। राज ठाकरे ने कहा, “महाराष्ट्र की नौकरियां और रोजगार महाराष्ट्र के मेरे मराठी युवक-युवतियों को मिलने चाहिए। आरक्षण चाहिए, लेकिन आरक्षण मिलने के बाद सवाल यह भी है कि सरकारी नौकरियां हैं कहां?” उन्होंने सरकारी संस्थानों के निजीकरण की नीति पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि चुनाव के समय मतदाताओं को पैसे और शराब के जरिए प्रभावित किया जाता है। छात्रों को आंदोलन की आगे की रणनीति सोच-समझकर बनाने की सलाह देते हुए राज ठाकरे ने कहा कि केवल नेताओं के आने, भाषण देने और तालियां बजाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने कहा- सरकार को पता चलना चाहिए कि दबाव क्या होता है। ऐसा दबाव पैदा कीजिए। राज ठाकरे ने छात्रों को भरोसा दिलाया कि उनकी समस्याओं के समाधान के लिए जिस भी स्तर पर प्रयास करने की आवश्यकता होगी, वह करेंगे। उन्होंने कहा- महाराष्ट्र के लड़के-लड़कियों को नौकरी दिलाने के लिए किसी के भी पैर पकड़ने पड़े, तो राज ठाकरे वे पैर पकड़ने के लिए तैयार है।
