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स्कूलों के आसपास जंक फूड और कैफीनयुक्त ड्रिंक बेचने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई: मंत्री नरहरी झिरवाल

हाफकिन को मजबूत बनाने के लिए जल्द होगी मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में बैठक

मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने स्कूलों के आसपास बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। शुक्रवार को खाद्य एवं औषधि प्रशासन मंत्री नरहरी झिरवाल ने विधानसभा में स्पष्ट किया कि यदि किसी स्कूल परिसर या उसके आसपास स्वास्थ्य के लिए हानिकारक खाद्य पदार्थ अथवा कैफीनयुक्त एनर्जी ड्रिंक की बिक्री होती पाई गई तो संबंधित लोगों के खिलाफ प्रचलित कानूनों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।विधानसभा में सदस्य विक्रम पाचपुते द्वारा स्टिंग एनर्जी ड्रिंक के सेवन से होने वाले स्वास्थ्य दुष्प्रभावों पर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में मंत्री झिरवाल ने कहा कि बच्चों को अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों और कैफीनयुक्त पेयों से बचाने के लिए संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं। उन्होंने बताया कि यदि ऐसी बिक्री की जानकारी मिले तो अभिभावक, शिक्षक, प्रधानाचार्य और जिला परिषद तत्काल खाद्य एवं औषधि प्रशासन को सूचित करें, ताकि दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सके। इस दौरान विधायक राहुल कुल और वरुण सरदेसाई ने भी पूरक प्रश्न पूछे।मंत्री ने बताया कि राज्य में वर्तमान में मुंबई, संभाजीनगर और नागपुर में खाद्य एवं औषधि परीक्षण की तीन प्रयोगशालाएं कार्यरत हैं। इसके अलावा रायगढ़, नासिक, यवतमाल और पुणे में नई प्रयोगशालाएं स्थापित की जा रही हैं। साथ ही सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर 22 नई प्रयोगशालाएं शुरू करने की योजना है, जिससे खाद्य नमूनों की जांच प्रक्रिया और अधिक तेज व प्रभावी होगी।उन्होंने जानकारी दी कि अप्रैल 2025 से मई 2026 के बीच स्टिंग एनर्जी ड्रिंक के 27 नमूने जांच के लिए लिए गए, जिनमें से 10 नमूने मानकों के अनुरूप पाए गए। वहीं अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के दौरान विभिन्न एनर्जी ड्रिंक्स के 115 नमूनों की जांच की गई, जिनमें 63 नमूने मानक के अनुरूप, एक नमूना निम्न गुणवत्ता का तथा छह नमूने मिथ्या छाप (Misbranded) पाए गए हैं। शेष नमूनों की जांच अभी जारी है।इसी दौरान मंत्री नरहरी झिरवाल ने हाफकिन बायो-फार्मास्युटिकल कॉरपोरेशन के संबंध में भी महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में जल्द ही एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित कर महामंडल को मजबूत बनाने के लिए आवश्यक निर्णय लिए जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि हाफकिन के निजीकरण का सरकार का कोई इरादा नहीं है।विधानसभा में सदस्य ज्योति गायकवाड़ द्वारा उठाए गए प्रश्न के उत्तर में मंत्री ने बताया कि हाफकिन के समग्र विकास के लिए गठित डॉ. आर.ए.माशेलकर समिति की रिपोर्ट सदन में प्रस्तुत की जाएगी तथा महामंडल में पूर्णकालिक आईएएस अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी। इसके अलावा 150 करोड़ रुपये के वित्तीय प्रस्ताव में आवश्यक त्रुटियों को दूर कर उसे पुनः वित्त विभाग को भेजा जाएगा।मंत्री ने बताया कि सौ वर्ष से अधिक पुरानी हाफकिन संस्था देश की प्रमुख सरकारी वैक्सीन निर्माता संस्थाओं में शामिल है, लेकिन आधुनिक उत्पादन संयंत्रों के अभाव में वर्ष 2007 से डीपीटी (त्रिगुणी) वैक्सीन का उत्पादन बंद है। माशेलकर समिति ने निष्क्रिय पोलियो वैक्सीन, पंचगुणी वैक्सीन, ऊतक संवर्धित रेबीज वैक्सीन, पिंपरी स्थित एंटी-वेनम एवं ब्लड प्रोडक्ट्स यूनिट के आधुनिकीकरण सहित पांच महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए अत्याधुनिक उत्पादन संयंत्र स्थापित करने की सिफारिश की है। इन परियोजनाओं के लिए लगभग 1,100 करोड़ रुपये की आवश्यकता बताई गई है। समिति ने सुझाव दिया है कि इसमें 100 करोड़ रुपये राज्य सरकार तथा शेष राशि केंद्र सरकार भागीदारी के रूप में उपलब्ध कराए। इसी क्रम में हाफकिन ने निष्क्रिय पोलियो वैक्सीन परियोजना के लिए 50 करोड़ रुपये तथा पिंपरी स्थित उत्पादन इकाई के आधुनिकीकरण के लिए 100 करोड़ रुपये, यानी कुल 150 करोड़ रुपये का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा है। वित्त विभाग द्वारा कुछ तकनीकी आपत्तियां उठाई गई हैं, जिन्हें दूर करने की प्रक्रिया जारी है। मंत्री ने कहा कि महामंडल की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के बाद आवश्यकतानुसार अतिरिक्त मानव संसाधन भी उपलब्ध कराया जाएगा।

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