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महाराष्ट्र में हाईवे किनारे अवैध ढाबों-रेस्टोरेंट पर सख्ती, 60 दिन में हटेंगे अनधिकृत निर्माण

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इंद्र यादव/मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्गों की सुरक्षा और अवैध निर्माण पर रोक लगाने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट द्वारा 13 अप्रैल 2026 को फालोदी हादसा मामले में जारी दिशा-निर्देशों के बाद की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्गों के Right of Way (ROW) में नए ढाबे, ईटरी या अन्य व्यावसायिक निर्माण पर तत्काल रोक लगाने तथा वहां मौजूद नए या अनधिकृत ढांचों को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत 60 दिनों के भीतर हटाने के निर्देश दिए थे।सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक राष्ट्रीय राजमार्ग की सीमा यानी Right of Way में किसी भी नए ढाबे, रेस्टोरेंट या व्यावसायिक ढांचे का निर्माण अथवा संचालन नहीं किया जा सकेगा। जिला प्रशासन को ऐसे अनधिकृत निर्माणों की पहचान कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा हाईवे सुरक्षा क्षेत्र में किसी भी स्थान के लिए नया लाइसेंस, एनओसी या व्यापारिक अनुमति देने अथवा पुराने लाइसेंस का नवीनीकरण करने से पहले संबंधित NHAI या PWD की मंजूरी जरूरी होगी। मौजूदा लाइसेंसों की भी निर्धारित समयसीमा में समीक्षा करने का निर्देश दिया गया है।इस पूरी व्यवस्था की निगरानी के लिए उन सभी जिलों में District Highway Safety Task Force गठित करने का निर्देश दिया गया है, जहां से राष्ट्रीय राजमार्ग गुजरता है। इसमें जिला प्रशासन, पुलिस, NHAI अथवा संबंधित भूमि स्वामित्व वाली एजेंसी, PWD और स्थानीय निकायों के अधिकारी शामिल होंगे। जिला कलेक्टर तथा पुलिस आयुक्त या पुलिस अधीक्षक को अनधिकृत निर्माण हटाने की कार्रवाई की संयुक्त जिम्मेदारी दी गई है। टास्क फोर्स को प्रत्येक पखवाड़े समीक्षा बैठक करने और कार्रवाई का रिकॉर्ड रखने के निर्देश दिए गए हैं।सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को राष्ट्रीय राजमार्ग के मध्य बिंदु से 40 मीटर तक आवासीय और 75 मीटर तक व्यावसायिक भूमि उपयोग में बदलाव पर रोक से संबंधित अधिसूचना जारी करने के निर्देश भी दिए हैं। यह व्यवस्था भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) के मानकों के अनुरूप तैयार की जानी है।अदालत ने हाईवे पर भारी और व्यावसायिक वाहनों की अनधिकृत पार्किंग को लेकर भी सख्त निर्देश दिए हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग की carriageway या paved shoulder पर ऐसे वाहनों को केवल निर्धारित पार्किंग बे, lay-by या Wayside Amenity में ही खड़ा करने की अनुमति होगी। इसके लिए निगरानी, पेट्रोलिंग और तकनीकी व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही राष्ट्रीय राजमार्गों पर नियमित निगरानी के लिए विशेष Highway Surveillance Teams गठित करने, दुर्घटना संभावित स्थानों यानी blackspots की पहचान करने तथा वहां पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था, चेतावनी संकेत और स्पीड निगरानी जैसी सुविधाएं विकसित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। हर 75 किलोमीटर के अंतराल पर आपातकालीन चिकित्सा सहायता और recovery crane जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा ट्रक lay-by विकसित करने पर भी जोर दिया गया है।सुप्रीम कोर्ट ने यह दिशा-निर्देश फालोदी और तेलंगाना में हुए गंभीर सड़क हादसों के बाद सड़क सुरक्षा से जुड़े व्यापक मुद्दों पर सुनवाई करते हुए जारी किए। अदालत ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग देश की कुल सड़क लंबाई का लगभग दो प्रतिशत हैं, लेकिन सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में उनका हिस्सा काफी अधिक है। अदालत ने सड़क उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार से जोड़ते हुए संबंधित एजेंसियों को निर्धारित समयसीमा में कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। महाराष्ट्र में इन निर्देशों के अनुपालन के तहत अब नगरपालिकाओं, नगर परिषदों, नगर पंचायतों, जिला प्रशासन, पुलिस, NHAI और PWD सहित संबंधित विभागों पर हाईवे किनारे मौजूद अनधिकृत निर्माण और सुरक्षा संबंधी उल्लंघनों पर कार्रवाई की जिम्मेदारी होगी। हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि राष्ट्रीय राजमार्ग के आसपास मौजूद हर वैध ढाबा या रेस्टोरेंट स्वतः बंद हो जाएगा। मुख्य कार्रवाई Right of Way में मौजूद अनधिकृत निर्माण और बिना आवश्यक मंजूरी वाले व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ होगी।अब निगाह इस बात पर है कि महाराष्ट्र में इन निर्देशों को जमीनी स्तर पर कितनी तेजी और सख्ती से लागू किया जाता है। हाईवे किनारे अवैध निर्माण, अनधिकृत पार्किंग और सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर प्रभावी कार्रवाई होने से दुर्घटनाओं के जोखिम को कम करने और यात्रियों के लिए सुरक्षित सड़क व्यवस्था तैयार करने में मदद मिल सकती है।

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