Wednesday, April 17, 2024
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शिंदे गुट के नेता की पत्नी ने की आत्महत्या, पुणे स्थित घर में जहर खाकर दी जान

पुणे: राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना से एकनाथ शिंदे गुट के बालासाहेबांची शिवसेना में शामिल हुए नेता निलेश माझिरे की पत्नी ने आत्महत्या की है. अपने पुणे स्थित निवास पर उन्होंने जहर खा लिया है. इस खबर के सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है. इस मामले में पुणे पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है. माझिरे की पत्नी ने बुधवार को जहर खाया था. उसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया. अस्पताल में इलाज के दौरान गुरुवार की रात अस्पताल में उनकी मौत हो गई.

निलेश माझिरे शिंदे गुट के बालासाहेबांची शिवसेना में माथाडी कामगार (मजदूर) सेना के जिलाध्यक्ष हैं. उनकी पत्नी की आत्महत्या की वजह पारिवारिक तनाव बताया जा रहा है. पुणे पुलिस इस बारे में जांच और पूछताछ शुरू कर चुकी है. केस दर्ज किया जा चुका है. पुलिस का प्रारंभिक अनुमान पारिवारिक तनाव की वजह से आत्महत्या का है. लेकिन तनाव की वजह क्या थी? विवाद किस बात पर था? इन सब बातों की जानकारियां जुटाई जा रही हैं.

राज ठाकरे ने माझिरे को पार्टी से निकाला था, फिर पकड़ा शिंदे गुट का साथ
निलेश माझिरे को पुणे का डैशिंग नेता कहा जाता है. कुछ दिनों पहले ही उन्हें राज ठाकरे ने अपनी पार्टी एमएनएस से निकाल दिया था. इसके बाद उन्होंने शिंदे गुट की बालासाहेबांची शिवसेना को ज्वाइन कर लिया था. माझिरे एमएनएस नेता वसंत मोरे के कट्टर समर्थक माने जाते हैं. पार्षद वसंत मोरे की खास बात यह है कि उनका अपने क्षेत्र में कट्टर मराठी और हिंदू वोटरों के साथ-साथ मुस्लिम वोटरों में भी गहरी पैठ है. इसीलिए जब राज ठाकरे ने मस्जिदों से लाउडस्पीकर से अजान देने के खिलाफ मुहिम शुरू की तो वसंत मोरे ने इसका विरोध किया.

राज ठाकरे नहीं, बाकियों से शिकायत…यह कहकर छोड़ी थी पार्टी
इसके बाद जब मोरे को एमएनएस में साइडलाइन किया जाने लगा तो निलेश माझिरे ने इसका विरोध किया. राज ठाकरे वसंत मोरे को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं कर सकते थे, इसलिए कहते हैं कि मोरे के कट्टर समर्थक निलेश माझिरे को पार्टी से निकाला गया. हालांकि माझिरे ये कहते रहे कि उन्होंने खुद ही मोरे के साथ पार्टी में किए जा रहे गलत व्यवहार से नाराज होकर पार्टी छोड़ी है.

निलेश माझिरे ने एमएनएस में रहते हुए ही अपनी ही पार्टी के एक नेता के खिलाफ मुहिम शुरू की थी. उन्होंने नारा लगाया था- बाबू वागस्कर हटाओ, मनसे बचाओ. पार्टी छोड़ते वक्त माझिरे ने कहा कि- हमारा अपने विट्ठल से विवाद नहीं, बाकियों से है. यहां भगवान विट्ठल से उन्होंने राज ठाकरे की तुलना की है. यानी उन्होंने तब भी यही दावा किया था कि उनके लिए राज ठाकरे भगवान हैं, लेकिन पार्टी के अंदर चल रही राजनीति से परेशान हैं. इसके बाद जब शिंदे गुट उद्धव ठाकरे के नेतृत्व के खिलाफ बगावत करते हुए अलग हुआ तो माझिरे शिंदे गुट में शामिल हो गए.

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