‘विमल इलायची’ विज्ञापन विवाद में कंपनी को झटका, दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज की याचिका
शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को महाराष्ट्र FDA ने जारी किया था नोटिस; कोर्ट बोला- महाराष्ट्र की अदालतें ही उचित फोरम

मुंबई/नई दिल्ली। ‘विमल इलायची’ के विज्ञापन को लेकर महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) की कार्रवाई के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट पहुंची PB Agro LLP को झटका लगा है। दिल्ली हाई कोर्ट ने कंपनी की वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें महाराष्ट्र FDA द्वारा बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को जारी कारण बताओ नोटिस को चुनौती दी गई थी। जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने याचिका को क्षेत्राधिकार के अभाव में सुनवाई योग्य नहीं माना। अदालत ने कहा कि विवादित नोटिस महाराष्ट्र FDA की मुंबई इकाई द्वारा जारी किए गए हैं और कथित गतिविधियां एवं वैधानिक उल्लंघन भी महाराष्ट्र से जुड़े हैं। ऐसे में कंपनी की आपत्तियों पर विचार करने के लिए महाराष्ट्र की अदालतें अधिक उपयुक्त फोरम हैं। महाराष्ट्र FDA ने 11 अगस्त 2026 को शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को ‘विमल इलायची’ के विज्ञापन को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किया था। FDA का आरोप है कि विज्ञापन के जरिए महाराष्ट्र में प्रतिबंधित पान मसाला उत्पाद का कथित रूप से अप्रत्यक्ष या सरोगेट प्रचार हो रहा है। नोटिस में कलाकारों से यह स्पष्ट करने के लिए संबंधित दस्तावेज मांगे गए कि ‘विमल इलायची’ एक स्वतंत्र उत्पाद है या प्रतिबंधित पान मसाला अथवा तंबाकू उत्पादों के लिए सरोगेट कम्युनिकेशन के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। FDA ने कलाकारों से विज्ञापन से अपनी भागीदारी समाप्त करने और सोशल मीडिया सहित विभिन्न प्लेटफॉर्म से संबंधित प्रचार सामग्री हटाने के लिए भी कहा था। PB Agro ने दिल्ली हाई कोर्ट में दलील दी कि उसका कारोबार दिल्ली से संचालित होता है, विज्ञापन अभियान की योजना और प्रबंधन दिल्ली से हुआ तथा ब्रांड एंबेसडरों को भुगतान भी दिल्ली से किया गया। कंपनी का कहना था कि नोटिस भले ही सीधे उसे जारी नहीं किए गए हों, लेकिन कार्रवाई का सीधा असर उसके कारोबार पर पड़ेगा। अदालत ने इन दलीलों को क्षेत्राधिकार स्थापित करने के लिए पर्याप्त नहीं माना। कोर्ट ने कहा कि केवल कंपनी का दिल्ली में कारोबार करना या उससे जुड़ी कुछ व्यावसायिक गतिविधियों का दिल्ली में होना, महाराष्ट्र की नियामक संस्था द्वारा की गई कार्रवाई को दिल्ली हाई कोर्ट के क्षेत्राधिकार में नहीं ला सकता। कंपनी ने सरोगेट विज्ञापन के आरोपों से भी इनकार किया है। उसका दावा है कि उसका विज्ञापन अभियान लागू कानूनों के अनुरूप है और संबंधित कलाकारों को केवल ‘विमल इलायची’ के प्रचार के लिए अनुबंधित किया गया था। हालांकि दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश का अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने ‘विमल इलायची’ के विज्ञापन को सरोगेट विज्ञापन घोषित कर दिया है। अदालत ने महाराष्ट्र FDA की कार्रवाई सही है या गलत, इस सवाल पर भी कोई फैसला नहीं दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिका क्षेत्राधिकार के आधार पर खारिज की जा रही है और कंपनी की चुनौती के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त नहीं की गई है। ऐसे में महाराष्ट्र FDA की ओर से शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को जारी कारण बताओ नोटिस से जुड़ा विवाद अब महाराष्ट्र में संबंधित कानूनी मंच पर आगे बढ़ सकता है।
