रामचरितमानस के पठन-पाठन से हिंदी का होगा विकास: हरगोविंद कुशवाहा

हिंदी राष्ट्रीय एकता की सशक्त कड़ी, विकसित भारत के संकल्प में निभाएगी महत्वपूर्ण भूमिका: प्रो. मुकेश पाण्डेय

बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में हिंदी सप्ताह-2026 का शुभारंभ; संगोष्ठी, भाषण प्रतियोगिता और पुस्तक विमोचन के साथ सजी साहित्यिक-सांस्कृतिक श्रृंखला

देवेश प्रताप सिंह राठौर
झांसी, उत्तर प्रदेश। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग की ओर से हिंदी दिवस के अवसर पर हिंदी सप्ताह-2026 का शुभारंभ साहित्यिक, सांस्कृतिक और वैचारिक कार्यक्रमों के साथ हुआ। 14 से 21 सितंबर तक चलने वाले हिंदी सप्ताह के पहले दिन ‘भारतीय संस्कृति एवं ज्ञान परंपरा के संबंध में हिंदी की भूमिका’ विषय पर संगोष्ठी, ‘राष्ट्रीय एकता के संवर्धन में हिंदी की भूमिका’ विषय पर भाषण प्रतियोगिता तथा पुस्तक विमोचन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. (डॉ.) मुकेश पाण्डेय ने की, जबकि मुख्य अतिथि बौद्ध संस्थान के अध्यक्ष एवं दर्जा प्राप्त मंत्री डॉ. हरगोविंद कुशवाहा रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती पूजन एवं वंदना से हुआ। कुलपति प्रो. मुकेश पाण्डेय और डॉ. हरगोविंद कुशवाहा ने साहित्यकार निहाल चंद्र शिवहरे की पुस्तक ‘हाइकु सरिता’ का विमोचन किया। हिंदी विभागाध्यक्ष एवं कला संकायाध्यक्ष प्रो. पुनीत बिसारिया ने अतिथियों का स्वागत करते हुए बताया कि सप्ताहभर के आयोजनों का उद्देश्य विद्यार्थियों में हिंदी भाषा और साहित्य के प्रति रुचि बढ़ाने के साथ उन्हें भारतीय संस्कृति, लोक परंपरा और ज्ञान विरासत से जोड़ना है। मुख्य अतिथि डॉ. हरगोविंद कुशवाहा ने भारतीय ज्ञान, दर्शन और हिंदी साहित्य के गहरे संबंधों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हिंदी साहित्य ने भारतीय दर्शन, आध्यात्मिकता और जीवन मूल्यों को सामान्य जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने सनातन परंपरा में हिंदी की महत्ता को रामचरितमानस से जोड़ते हुए कहा कि रामचरितमानस के नियमित पठन-पाठन से हिंदी के प्रचार-प्रसार और विकास को नई शक्ति मिल सकती है। उन्होंने रामचरितमानस की चौपाइयों का सस्वर पाठ भी किया, जिस पर सभागार तालियों से गूंज उठा। कुशवाहा ने कहा कि हिंदी के प्रचार का सबसे प्रभावी माध्यम अपनी भाषा के प्रति सम्मान और दैनिक जीवन में उसका नियमित प्रयोग है। उन्होंने बुंदेलखंड की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का उल्लेख करते हुए महर्षि व्यास, वशिष्ठ मुनि, रणछोड़दास और राजा मुचकुंद से जुड़ी परंपराओं तथा बेतवा नदी के सांस्कृतिक महत्व पर भी प्रकाश डाला। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश लोकभूषण पुरस्कार से सम्मानित पन्नालाल असर, साहित्यकार विजय कुमार सैनी और निहाल चंद्र शिवहरे के साथ गायत्री परिवार की रमा भारद्वाज, नंदिनी एवं किरण श्रीवास्तव को सम्मानित किया गया। कुलपति प्रो. मुकेश पाण्डेय ने कहा कि भारतीय संस्कृति अनेक भाषाओं, बोलियों और परंपराओं से मिलकर बनी है और हिंदी देश को एकता के सूत्र में जोड़ने वाली महत्वपूर्ण संपर्क भाषा है। राजभाषा के रूप में स्थापित होने के बाद हिंदी की भूमिका केवल सरकारी कार्यालयों तक सीमित नहीं रही, बल्कि साहित्य, पत्रकारिता, सिनेमा, शिक्षा, सामाजिक जीवन और जनसंचार में भी उसका विस्तार हुआ है। उन्होंने कहा कि हिंदी अब भारत की सीमाओं से बाहर भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रही है और अनेक विदेशी विश्वविद्यालयों में हिंदी अध्ययन के पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, “हिंदी हमारी शान है, हमारी पहचान है, हमारी अभिव्यक्ति और संवेदना है तथा पूरे देश को एक सूत्र में जोड़ने वाली कड़ी है।” प्रो. पाण्डेय ने विकसित भारत-2047 के संकल्प में भारतीय भाषाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि हिंदी जैसे व्यापक संपर्क माध्यम से ज्ञान, तकनीक और विकास से संबंधित सूचनाएं अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाई जा सकती हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में हिंदी एवं अन्य भारतीय भाषाओं में मौजूद आध्यात्मिक, दार्शनिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक ज्ञान को तकनीक की मदद से दुनिया के व्यापक वर्ग तक पहुंचाने की संभावनाएं बढ़ी हैं। हिंदी सप्ताह के तहत आयोजित भाषण प्रतियोगिता में गार्गी जीत, वैष्णवी त्रिपाठी, नमन चतुर्वेदी, राजू वंशकार, दीपा यादव, पूजा अहिरवार, आजाद, अमित अहिरवार और दिव्या निगम सहित विभिन्न विभागों के विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों ने हिस्सा लिया। प्रतिभागियों ने हिंदी को विभिन्न भाषायी और सांस्कृतिक समुदायों के बीच संवाद का माध्यम बताते हुए कहा कि हिंदी की शक्ति दूसरी भारतीय भाषाओं का स्थान लेने में नहीं, बल्कि उनके साथ समन्वय स्थापित कर राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने में है। गायत्री परिवार शांतिकुंज की किरण श्रीवास्तव ने नारी जागरण और युवा निर्माण पर विचार रखे। रमा भारद्वाज और नंदिनी ने ढपली के साथ विचार क्रांति से जुड़ा प्रेरक गीत प्रस्तुत किया। हिंदी सप्ताह के तहत 17 सितंबर को निबंध लेखन प्रतियोगिता के अलावा आगामी दिनों में कवि सम्मेलन तथा हिंदी-बुंदेली सिनेमा से संबंधित कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. बिपिन कनौजिया ने किया और डॉ. श्रीहरि त्रिपाठी ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर फूड साइंस टेक्नोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. डी.के. भट्ट, डॉ. नवीन पटेल, डॉ. राघवेंद्र दीक्षित, उमेश शुक्ला, डॉ. अभिषेक कुमार, डॉ. सुधा दीक्षित, डॉ. प्रेमलता सहित बड़ी संख्या में शिक्षक और विद्यार्थी मौजूद रहे।

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