
मुंबई। जाने-माने लेखक व व्यंग्यकार राजेश विक्रांत को महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी के प्रतिष्ठित राज्य स्तरीय जीवन गौरव सम्मान- छत्रपति शिवाजी महाराज राष्ट्रीय एकता पुरस्कार से सम्मानित किया गया। मंगलवार को बांद्रा पश्चिम के रंग शारदा ऑडिटोरियम में आयोजित समारोह में उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया। महाराष्ट्र के सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशीष शेलार ने अकादमी के कार्याध्यक्ष डॉ. एस.पी.दुबे, उपाध्यक्ष मंजू लोढ़ा, आरटीआई एक्टिविस्ट अनिल गलगली, साहित्यकार डॉ. सुधाकर मिश्र, वरिष्ठ पत्रकार विमल मिश्र तथा पूर्व दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री की उपस्थिति में राजेश विक्रांत को स्मृति चिन्ह, प्रशस्ति पत्र और 1 लाख रुपए की नकद राशि देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत सह निदेशक व अकादमी के सदस्य सचिव सचिन निंबालकर ने किया, जबकि संचालन आनंद सिंह व प्रसाद काथे ने संभाला।
15,000 से अधिक लेख, कई चर्चित कृतियां
राजेश विक्रांत के लेखन सफर में अब तक देशभर की 50 से अधिक पत्र-पत्रिकाओं में 15,000 से भी ज्यादा लेख प्रकाशित हो चुके हैं। उनके व्यंग्य संग्रह “बतरस” को महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी द्वारा आचार्य रामचंद्र शुक्ल व्यंग्य पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। उनकी प्रमुख प्रकाशित कृतियों में “सत्संग सार” (2001), “मुंबई में एक और समंदर” (2005), “कथा पुष्पांजलि” (2012), “हास्य से पगी यादें” (2012), “मुंबई माफिया: एक एन्साइक्लोपीडिया” (2012), “श्रीमत परमहंस अद्भुत चरित” (2013), “महामंडलेश्वर विश्वेश्वरानंद गिरिजी महाराज गौरव ग्रंथ”, “अवधी ग्रन्थावली, खंड 6 शब्दकोश”, “आमची मुंबई” (2019), “अमेठी के मुंबईकर” (2019), “कोरोना-डाउन” (2021), “आजादी की लड़ाई में मुंबई का योगदान” (2022) और “मुंबई और हिंदी” (2024) शामिल हैं। उनकी तीन किताबें प्रकाशनाधीन हैं- “आमची मुंबई-2”, “रोम-रोम में राम: मुंबई में रामलीला के भगीरथ कर्मवीर पंडित शोभनाथ मिश्र की जीवन गाथा” और “दृश्य संचार”। इसके अलावा, उनके व्यक्तित्व व कृतित्व पर आधारित पुस्तक “राजेश विक्रांत: व्यक्ति एक, व्यक्तित्व अनेक” का संपादन अभय मिश्र ने किया था, जिसे अक्टूबर 2015 में प्रकाशित किया गया था। इस सम्मान के लिए राजेश विक्रांत को साहित्य जगत से खूब सराहना मिल रही है।




