
मुंबई। मुंबई में मानसून के दौरान संभावित बाढ़ और जलभराव की स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए रेलवे, बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी), बेस्ट, जिला प्रशासन, मेट्रो तथा अन्य संबंधित प्राधिकरणों को आपसी समन्वय के साथ एक संयुक्त इंटीग्रेटेड आपदा प्रबंधन योजना तैयार करनी चाहिए। यह निर्देश मुंबई उपनगर के पालकमंत्री आशिष शेलार ने दिए। शुक्रवार को पश्चिम रेलवे मुख्यालय में आयोजित बैठक में रेलवे क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले नालों की सफाई और मानसून पूर्व तैयारियों की समीक्षा की गई। बैठक में बीएमसी के अतिरिक्त आयुक्त अविनाश ढाकणे, मध्य रेलवे के मंडल महाप्रबंधक हिरेश मीणा, पश्चिम रेलवे के मंडल महाप्रबंधक पंकज सिंह, मुंबई शहर और उपनगर के जिलाधिकारी, रेलवे, बीएमसी तथा अग्निशमन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में पश्चिम रेलवे ने बताया कि चर्चगेट से विरार के बीच जलनिकासी को बेहतर बनाने के लिए रेलवे ट्रैक के नीचे कुल 15 माइक्रो टनल बनाए गए हैं, जिनमें से 4 इस वर्ष पूरे किए गए हैं। जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए 126 पंप लगाए गए हैं तथा लगभग 2400 वैगन गाद निकाली गई है। वहीं मध्य रेलवे ने 350 किलोमीटर लंबे मार्ग पर स्थित 160 नालों और ड्रेनेज लाइनों की सफाई पूरी कर ली है तथा 220 पंप स्थापित किए हैं। दोनों रेलवे मार्गों पर सीसीटीवी कैमरे और वर्षामापक यंत्र भी लगाए गए हैं। कांजूरमार्ग के उषानगर नाले और कुर्ला के ब्राह्मणवाड़ी नाले का गहरीकरण और चौड़ीकरण किए जाने से पानी की निकासी तेज होने की उम्मीद जताई गई। बैठक में बीएमसी और अग्निशमन विभाग ने भी अपने सुझाव प्रस्तुत किए। अधिकारियों ने बताया कि पिछले वर्षों की तुलना में रेलवे और बीएमसी के बीच समन्वय अब अधिक बेहतर हुआ है। पालकमंत्री आशिष शेलार ने कहा कि यदि भारी बारिश के कारण बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न होती है, तो रेलवे स्टेशनों पर बढ़ने वाली भीड़ को नियंत्रित करने, यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालने, आसपास की यातायात व्यवस्था सुचारु रखने तथा यात्रियों को भोजन और पेयजल उपलब्ध कराने के लिए सभी एजेंसियों को मिलकर एक विस्तृत इंटीग्रेटेड प्लान तैयार करना चाहिए। उन्होंने रेलवे और बीएमसी के सीसीटीवी नेटवर्क, सूचना प्रसारण प्रणाली, आपातकालीन नियंत्रण कक्ष और पंपिंग सिस्टम के बीच समन्वय स्थापित करने के निर्देश भी दिए। इसके साथ ही रेलवे स्टेशनों के भीतर और बाहर स्थित पैदल पुलों, यातायात पुलों तथा रेलवे परिसरों में लगे होर्डिंग्स का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने पर भी जोर दिया। शेलार ने मस्जिद बंदर क्षेत्र में रेलवे की सीमा के भीतर स्थित 24 जर्जर और खतरनाक इमारतों तथा कुछ झुग्गियों के पुनर्वास के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर राज्य सरकार को भेजने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि मुंबई जैसे महानगर में मानसून के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय, तकनीक का उपयोग और समय पर तैयारी ही सबसे प्रभावी उपाय है।

