
मुंबई। मुंबई की सेशंस कोर्ट ने आईपीएस अधिकारी रश्मि करंदीकर के पति पुरुषोत्तम चव्हाण को धोखाधड़ी के दो मामलों में जमानत दे दी है। चव्हाण को आर्थिक अपराध शाखा (ईओडबल्यू) द्वारा जांच किए जा रहे मामलों में गिरफ्तार किया गया था। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी लंबे समय से न्यायिक हिरासत में है और एक वर्ष बीत जाने के बावजूद पुलिस उसके पास से कोई संपत्ति बरामद नहीं कर सकी है। इसी आधार पर अदालत ने जमानत मंजूर की। पहले मामले के अनुसार, 30 जनवरी 2025 को दर्ज शिकायत में चव्हाण और उसके सहयोगियों पर निवेशकों को कम कीमत पर फ्लैट दिलाने का झांसा देकर 24.78 करोड़ रुपये से अधिक की राशि लेने का आरोप है। आरोप है कि फर्जी दस्तावेज तैयार कर उन्हें ठाणे-5 के संयुक्त उप-पंजीयक कार्यालय तथा परेल और सेवरी के मुद्रांक पंजीकरण कार्यालयों में पंजीकृत कराया गया। दूसरे मामले में, 31 जनवरी 2025 को दर्ज शिकायत के तहत चव्हाण और उसके साथियों पर सरकारी कोटे में सस्ते प्लॉट दिलाने का वादा कर 7.42 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी करने का आरोप है। बताया गया कि आरोपी ने पुणे और ठाणे नगर निगम के विकास अधिकार प्रमाण पत्र तथा महाराष्ट्र पुलिस अकादमी को आपूर्ति के कथित अनुबंध दिखाकर निवेशकों को विश्वास में लिया। चव्हाण के वकील संदीप कर्णिक ने मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद सेशंस कोर्ट में जमानत अर्जी दायर की थी। बचाव पक्ष ने दलील दी कि आरोपी लंबे समय से जेल में बंद है और उसे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के एक अलग मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पहले ही जमानत मिल चुकी है। वहीं, अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए आशंका जताई कि आरोपी सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकता है या संपत्ति को खुर्द-बुर्द कर सकता है। हालांकि, अदालत ने टिप्पणी की कि “लंबे समय तक हिरासत में रहने मात्र से जमानत से इनकार नहीं किया जा सकता,” और दोनों मामलों में आरोपी को राहत दे दी।




