
मुंबई। राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने कहा कि विद्यालय केवल शिक्षा प्रदान करने वाली संस्था नहीं, बल्कि व्यक्तित्व विकास, संस्कारों के संवर्धन और जीवन को सही दिशा देने का केंद्र है। आज विद्यार्थियों द्वारा अर्जित शिक्षा, मूल्य और संस्कार ही भविष्य के जागरूक नागरिक, संवेदनशील व्यक्तित्व और राष्ट्रनिर्माता तैयार करेंगे। उन्होंने विद्यार्थियों से शिक्षा के साथ-साथ खेल, योग और संगीत को भी जीवन में समान महत्व देने का आह्वान किया। सोमवार को नए शैक्षणिक वर्ष के पहले दिन बृहन्मुंबई महानगरपालिका के भायखला स्थित मुंबई पब्लिक स्कूल में आयोजित ‘शाला प्रवेशोत्सव’ कार्यक्रम में राज्यपाल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। इस अवसर पर बृहन्मुंबई महानगरपालिका आयुक्त अश्विनी भिडे, शिक्षा समिति अध्यक्ष राजेश्री शिरवडकर, राज्यपाल के सचिव डॉ. प्रशांत नारनवरे, अतिरिक्त आयुक्त (शिक्षा) डॉ. अविनाश ढाकणे तथा अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। राज्यपाल ने नए शैक्षणिक वर्ष की शुरुआत करने वाले सभी विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए पहली बार स्कूल आने वाले बच्चों का विशेष स्वागत किया। उन्होंने विद्यार्थियों से नियमित रूप से विद्यालय आने, जिज्ञासु प्रवृत्ति विकसित करने, प्रश्न पूछने तथा शिक्षा के साथ नैतिक मूल्यों और जीवन कौशल को आत्मसात करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प को साकार करने में आज की छात्र पीढ़ी की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इसलिए विद्यार्थियों को केवल शैक्षणिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि जीवनोपयोगी कौशल और सकारात्मक संस्कार भी प्राप्त करने चाहिए। राज्यपाल ने विद्यालयों में संगीत और योग शिक्षा को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि संगीत से संवेदनशीलता और सृजनात्मकता विकसित होती है, जबकि योग शरीर और मन को स्वस्थ बनाता है। उन्होंने विद्यार्थियों से अधिक मित्र बनाने, एक-दूसरे से सीखने और सामूहिक गतिविधियों में भाग लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मोबाइल फोन पर अत्यधिक समय बिताने के बजाय विद्यार्थियों को मैदानी खेलों में अधिक भाग लेना चाहिए। खेलों से स्वास्थ्य, आत्मविश्वास, अनुशासन और टीम भावना का विकास होता है। स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन ही सफलता की मजबूत नींव हैं। राज्यपाल ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए विद्यार्थियों का व्यक्तित्व, शिक्षा और संस्कार मजबूत करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। आज के दौर में कौशल विकास, खेल, बहुभाषी शिक्षा और डिजिटल साक्षरता अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए सक्षम और आत्मनिर्भर बनाना शिक्षा व्यवस्था का प्रमुख उद्देश्य होना चाहिए। इस अवसर पर महानगरपालिका आयुक्त अश्विनी भिडे ने मुंबई महानगरपालिका स्कूलों में चलाए जा रहे विभिन्न शैक्षणिक उपक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि महानगरपालिका स्कूलों में आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं तथा विद्यार्थियों के लिए सीखने की प्रक्रिया को अधिक आनंददायी बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य बोर्ड के साथ-साथ सीबीएसई और आईसीएसई पाठ्यक्रम भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ताकि विद्यार्थी बदलते समय की आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षा प्राप्त कर सकें। कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने विद्यालय की प्रवेश प्रक्रिया का अवलोकन किया तथा खगोलशास्त्र प्रयोगशाला, प्री-प्राइमरी कक्षाओं, स्मार्ट क्लासरूम, कंप्यूटर लैब और एफएलएन प्रयोगशाला का निरीक्षण किया। उन्होंने विद्यार्थियों को शैक्षणिक सामग्री तथा मध्यान्ह भोजन का प्रतीकात्मक वितरण भी किया। कार्यक्रम में शिक्षा समिति अध्यक्ष राजेश्री शिरवडकर ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी, जबकि अतिरिक्त आयुक्त डॉ. अविनाश ढाकणे ने महानगरपालिका विद्यालयों में हुए सकारात्मक बदलावों पर प्रकाश डाला।



