‘Rent a Garba Partner’ के नाम पर ₹1,000 से ₹6,500 तक के पैकेज, विधायक संजय उपाध्याय ने पुलिस आयुक्त से की कार्रवाई व जांच की मांग
सिल्वर, गोल्ड और प्लैटिनम पैकेज में महिला-पुरुष साथी उपलब्ध कराने का दावा; ठगी और महिलाओं की सुरक्षा की आशंका

मुंबई। नवरात्रि उत्सव से पहले सोशल मीडिया पर वायरल हो रही ‘Rent a Garba Partner’ की कथित पेशकश ने विवाद खड़ा कर दिया है। इंस्टाग्राम सहित सोशल मीडिया पर प्रसारित विज्ञापनों में ₹1,000 से ₹6,500 तक के अलग-अलग पैकेज के जरिए गरबा खेलने के लिए महिला या पुरुष साथी उपलब्ध कराने का दावा किया जा रहा है। इन विज्ञापनों को गंभीरता से लेते हुए विधायक संजय उपाध्याय ने पूरे मामले की तत्काल जांच कराने और किसी तरह का गैरकानूनी या संदिग्ध कारोबार सामने आने पर संबंधित आयोजकों, विज्ञापनदाताओं तथा जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग पुलिस प्रशासन से की है। सोशल मीडिया पर वायरल विज्ञापनों में ‘सिल्वर’, ‘गोल्ड’ और ‘प्लैटिनम’ जैसे पैकेज का उल्लेख किया गया है। इनमें गरबा खेलने के लिए पार्टनर उपलब्ध कराने के साथ डांस और गरबा स्टेप्स सिखाने, साथ में फोटो और वीडियो बनाने तथा कुछ अतिरिक्त ‘सोशल’ सेवाएं देने जैसे दावे भी किए गए हैं। अलग-अलग सेवाओं के आधार पर ₹1,000 से लेकर ₹6,500 तक की रकम मांगे जाने की बात सामने आई है। विधायक उपाध्याय ने सवाल उठाया है कि ‘गरबा पार्टनर’ के नाम पर वास्तव में किस तरह की सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं और इन विज्ञापनों के पीछे कौन लोग या संस्थाएं सक्रिय हैं। उन्होंने मांग की है कि विज्ञापन प्रसारित करने वाले सोशल मीडिया अकाउंट, उनसे जुड़े मोबाइल नंबर, भुगतान के माध्यम तथा आयोजकों की पृष्ठभूमि की जांच की जाए। उपाध्याय ने आशंका जताई है कि इस तरह के विज्ञापनों की आड़ में नागरिकों के साथ आर्थिक धोखाधड़ी या अन्य गैरकानूनी गतिविधियां हो सकती हैं। विशेष रूप से महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलिस को मामले की गहराई से जांच करनी चाहिए और किसी तरह का गैरप्रकार मिलने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए। इस बीच गुजरात में भी इस तरह के ‘गरबा पार्टनर’ विज्ञापनों को लेकर साइबर अपराध से जुड़े संभावित जोखिमों की चर्चा सामने आई है। अहमदाबाद, सूरत और मुंबई से जुड़े बताए जा रहे कुछ सोशल मीडिया अकाउंट की जांच किए जाने की खबरें हैं। यह भी देखा जा रहा है कि कहीं ऐसे विज्ञापनों का इस्तेमाल लोगों को संदिग्ध लिंक या व्हॉट्सऐप संपर्क की ओर ले जाकर फिशिंग, अकाउंट हैकिंग अथवा आर्थिक धोखाधड़ी के लिए तो नहीं किया जा रहा। हालांकि इन आशंकाओं की पुष्टि संबंधित जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। उपाध्याय ने कहा कि नवरात्रि केवल मनोरंजन का आयोजन नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपरा से जुड़ा उत्सव है। इसलिए इसके नाम पर सोशल मीडिया पर चल रहे संदिग्ध व्यावसायिक विज्ञापनों की सत्यता की जांच जरूरी है। उन्होंने महिला और नागरिकों की सुरक्षा के साथ नवरात्रोत्सव की गरिमा और पवित्रता बनाए रखने के लिए ऐसी संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी रखने तथा जरूरत पड़ने पर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई करने की भी मांग की है। फिलहाल सोशल मीडिया पर किए जा रहे इन दावों की प्रामाणिकता जांच का विषय है। ऐसे में नागरिकों से भी अनजान सोशल मीडिया अकाउंट पर निजी जानकारी साझा करने, संदिग्ध लिंक खोलने अथवा बिना सत्यापन अग्रिम भुगतान करने से बचने की अपील की जा रही है।
