महाराष्ट्र कैबिनेट के बड़े फैसले: मोघरपाड़ा के 198 प्रभावितों को विकसित भूखंड, खार के रामकृष्ण नगर का होगा पुनर्विकास

मेट्रो कारशेड के लिए जमीन देने वालों को मालिकाना हक से मिलेंगे भूखंड; धुले RTO कार्यालय का रास्ता साफ, कृषि विभाग का संशोधित पद ढांचा रद्द


मुंबई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई महाराष्ट्र मंत्रिमंडल की बैठक में मुंबई मेट्रो परियोजना, म्हाडा की इमारतों के पुनर्विकास, धुले शहर विकास योजना और कृषि विभाग से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी गई। ठाणे के मोघरपाड़ा में मुंबई मेट्रो लाइन 4, 4A और 10 के एकीकृत कारशेड-डिपो के लिए जमीन देने वाले परियोजना प्रभावितों को विकसित भूखंड मालिकाना हक के साथ आवंटित करने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत कुल 198 प्रभावित किसानों एवं धारकों को पात्रता के अनुसार 22.5 प्रतिशत और 12.5 प्रतिशत विकसित भूखंड दिए जाएंगे।
मुंबई महानगर क्षेत्र में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था मजबूत करने के लिए MMRDA ने मेट्रो नेटवर्क की विस्तृत योजना तैयार की है। वडाला से कासारवडवली तक मेट्रो लाइन-4 को महत्वपूर्ण शहरी परिवहन परियोजना घोषित किया गया है और इसे आगे गायमुख तक विस्तारित किया गया है। मेट्रो लाइन 4, 4A, 10 और 11 की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ठाणे के मोघरपाड़ा में एकीकृत कारशेड-डिपो विकसित किया जा रहा है। सर्वे नंबर 30 की कुल 211.76 हेक्टेयर भूमि में से 174.01 हेक्टेयर भूमि MMRDA को प्राप्त हुई है। कैबिनेट के निर्णय के मुताबिक इस जमीन से प्रभावित 167 किसानों और 31 अतिक्रमणधारक किसानों को विकसित भूखंड मालिकाना अधिकार यानी भूमि धारणाधिकार वर्ग-1 के तहत आवंटित किए जाएंगे। MMRDA ने इससे पहले भी 167 पट्टाधारियों और 31 अतिक्रमणधारकों सहित कुल 198 लोगों को ऑफर लेटर जारी किए जाने की जानकारी दी थी।
मंत्रिमंडल ने मुंबई के खार पश्चिम स्थित रामकृष्ण नगर में म्हाडा की इमारतों के समूह पुनर्विकास को भी मंजूरी दी है। इसके साथ ही परियोजना के लिए डेवलपर नियुक्त करने का रास्ता साफ हो गया है। मुंबई शहर और उपनगरों में किफायती आवास उपलब्ध कराने के लिए म्हाडा के मुंबई मंडल ने 1950 से 1960 के बीच मध्यम और निम्न आय वर्ग के लिए 56 कॉलोनियां विकसित की थीं, जिनमें 114 सहकारी गृहनिर्माण संस्थाएं शामिल हैं। इन्हीं में खार पश्चिम स्थित रामकृष्ण नगर भी शामिल है।
रामकृष्ण नगर की जमीन का क्षेत्रफल 25,523.90 वर्ग मीटर है और यहां कुल 19 इमारतें हैं, जिनमें 18 आवासीय तथा एक कार्यालयीन इमारत शामिल है। इनका निर्माण करीब 1985 में हुआ था। कुछ इमारतों की जर्जर स्थिति को देखते हुए निवासियों के बेहतर पुनर्वास और जीवनस्तर में सुधार के उद्देश्य से समूह पुनर्विकास को मंजूरी दी गई है। कुछ भूखंडों को छोड़कर शेष क्षेत्र में डेवलपर की नियुक्ति कर म्हाडा के माध्यम से पुनर्विकास किया जाएगा। परियोजना को तेजी से पूरा कराने के लिए आवास विभाग के सचिव की अध्यक्षता में उच्चाधिकार समिति गठित करने को भी मंजूरी दी गई है।
कैबिनेट ने धुले शहर की विकास योजना में भी महत्वपूर्ण बदलाव को मंजूरी दी। देवपुर स्थित सर्वे नंबर 103 की जमीन पर खेल मैदान और बगीचे के लिए निर्धारित आरक्षण को हटाकर इसे सार्वजनिक एवं अर्ध-सार्वजनिक उपयोग क्षेत्र में शामिल किया जाएगा। इस फैसले से धुले के उप प्रादेशिक परिवहन अधिकारी कार्यालय से जुड़े निर्माण और अन्य सुविधाओं के विकास का रास्ता साफ हो गया है।
इस जमीन के 2 हेक्टेयर 885 आर क्षेत्र का स्वामित्व उप प्रादेशिक परिवहन अधिकारी, धुले के पास है। यहां पहले से वाहन जांच, वाहन पंजीकरण और ड्राइविंग लाइसेंस परीक्षण जैसी गतिविधियां संचालित की जाती हैं। जांच दल एवं अन्य सुविधाओं के लिए इमारतों का निर्माण भी शुरू किया गया है, जिस पर करीब ₹94.50 लाख खर्च होने की जानकारी दी गई है। इसी कारण खेल मैदान और बगीचे का आरक्षण हटाकर क्षेत्र को सार्वजनिक-अर्धसार्वजनिक उपयोग में शामिल करने का प्रस्ताव पेश किया गया था, जिसे महाराष्ट्र क्षेत्रीय एवं नगर नियोजन अधिनियम के प्रावधानों के तहत मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी।
मंत्रिमंडल ने कृषि विभाग के संशोधित पद ढांचे को रद्द करने का भी फैसला किया है। कृषि विभाग के क्षेत्रीय कार्यालयों के लिए वर्ष 2009 के 27,502 पदों वाले स्वीकृत ढांचे के आधार पर 23,434 पदों का संशोधित ढांचा तैयार किया गया था। इसे पहले मंत्रिमंडल की मंजूरी मिल चुकी थी, लेकिन कृषि विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों और विभिन्न संगठनों ने इसके क्रियान्वयन पर आपत्ति जताई थी। राज्य में एल नीनो की पृष्ठभूमि में बनी सूखे जैसी परिस्थितियों, किसानों की समस्याओं और क्षेत्रीय स्तर पर कृषि विभाग की बढ़ती जिम्मेदारियों को देखते हुए संशोधित ढांचा रद्द करने का प्रस्ताव पेश किया गया। इसके बाद अब वर्ष 2009 का स्वीकृत पद ढांचा फिलहाल जारी रहेगा। साथ ही मंत्रिमंडल ने कृषि विभाग को नया संशोधित प्रस्ताव तैयार करने की अनुमति दी है। नए प्रस्ताव में विभाग के मौजूदा कार्यभार, उपलब्ध मानव संसाधन, रिक्त पदों, अलग-अलग संवर्गों की आवश्यकता, क्षेत्रीय तंत्र के लिए जरूरी सुविधाओं, किसान केंद्रित योजनाओं के बढ़ते कार्यभार और भविष्य की प्रशासनिक जरूरतों का व्यापक आकलन किया जाएगा। इसके आधार पर कृषि विभाग का नया पद ढांचा सरकार के समक्ष पेश किया जाएगा।

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