
मुंबई। अवैध गुटखा कारोबार के खिलाफ कार्रवाई में महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एक्ट (MCOCA) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 328 लागू करने के फैसले के विरोध में मंगलवार को महाराष्ट्र भर से सैकड़ों पान विक्रेता मुंबई के आजाद मैदान में जुटे। महाराष्ट्र पान व्यापारी महासंघ द्वारा आयोजित इस प्रदर्शन को संगठन ने राज्य के पान विक्रेताओं का अब तक का सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन बताया। संगठन का दावा है कि यह आंदोलन राज्य के सात लाख से अधिक पान विक्रेताओं और उनके परिवारों के हितों का प्रतिनिधित्व करता है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे प्रतिबंधित गुटखा के कारोबार के खिलाफ कार्रवाई का समर्थन करते हैं, लेकिन उन्हें आशंका है कि कड़े कानूनी प्रावधानों का इस्तेमाल छोटे व्यापारियों के खिलाफ भी किया जा सकता है। महाराष्ट्र सरकार और खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने अवैध गुटखा के निर्माण, परिवहन, भंडारण और वितरण में शामिल संगठित नेटवर्क के खिलाफ MCOCA और BNS की धारा 328 के तहत कार्रवाई की बात कही है। वहीं पान विक्रेताओं का कहना है कि संगठित अपराध में शामिल लोगों और छोटे दुकानदारों के बीच स्पष्ट अंतर किया जाना चाहिए। महाराष्ट्र पान व्यापारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष एवं प्रवक्ता अजीत सूर्यवंशी ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और संगठन को न्यायिक प्रक्रिया पर पूरा भरोसा है। उन्होंने दावा किया कि हाई कोर्ट के फैसलों में ऐसे मामलों में धारा 328 लागू करने को लेकर सवाल उठाए गए हैं और सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला आना अभी बाकी है। प्रदर्शन में शामिल पान विक्रेताओं ने आशंका जताई कि कठोर कानूनों के दुरुपयोग से छोटे व्यापारियों का उत्पीड़न और भ्रष्टाचार बढ़ सकता है। उनका कहना था कि MCOCA जैसे कानून संगठित अपराध सिंडिकेट के खिलाफ बनाए गए हैं और आम दुकानदारों के खिलाफ इनका इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने महाराष्ट्र सरकार से मांग की कि प्रतिबंधित उत्पादों को लेकर केवल राज्य के व्यापारियों को निशाना बनाने के बजाय देशभर में एक समान नीति लागू की जाए। साथ ही संगठित अपराध और वैध खुदरा कारोबार के बीच स्पष्ट अंतर करते हुए कानून का पालन करने वाले दुकानदारों के हितों की रक्षा की जाए। महाराष्ट्र पान व्यापारी महासंघ ने पान विक्रेताओं से अपने व्यवसाय की गरिमा बनाए रखने और दुकानों से किसी भी प्रकार के गैर-कानूनी एवं प्रतिबंधित पदार्थ की बिक्री नहीं करने की अपील भी की। संगठन ने कहा कि कुछ लोगों की गैर-कानूनी गतिविधियों के कारण राज्य के लाखों कानून का पालन करने वाले पान विक्रेताओं की साख और आजीविका प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

