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श्रीमद् भागवत कथा के अंतिम दिवस राजा हरिश्चंद्र एवं परीक्षित मोक्ष की प्रेरणादायी कथा का किया गया रसपान

उन्नाव, उत्तर प्रदेश। क्षेत्र के ग्राम शिवदुलार पुरवा (मिश्र खेड़ा) में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिवस शुक्रवार को कथा व्यास आचार्य रघुवीर शरण ने श्रोता भक्तों को राजा हरिश्चन्द्र एवं परीक्षित मोक्ष की प्रेरणादायी कथा का रसपान कराया। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रसंगों से मानव को जीवन में सत्यनिष्ठा, ईमानदारी और कर्तव्य परायणता की सीख मिलती है।कथाव्यास ने कहा कि राजा हरिश्चन्द्र सत्य, धर्म और त्याग के प्रतीक थे। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी सत्य का मार्ग नहीं छोड़ा और अपने वचनों का पालन करते हुए अनेक कष्ट सहे। उन्होंने उपदेश दिया कि मानव को हर परिस्थिति में सत्य का साथ देना चाहिए। अंततः सत्य की ही विजय होना सुनिश्चित है। आचार्य ने परीक्षित मोक्ष का वर्णन करते हुए बताया कि जब राजा परीक्षित को श्रापवश सात दिनों में मृत्यु का भान हुआ तो उन्होंने सांसारिक मोह त्यागकर श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण किया। परम ज्ञानी संत शुकदेव मुनि द्वारा सुनाई गई कथा के प्रभाव से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई। कथा समाप्ति पर विशाल भंडारा आयोजित किया गया। भंडारे में गांव- जवार के हजारों भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया।कथा और भंडारे की व्यवस्था दिनेश यादव, जगत नारायण, अनिल कुमार, अनिरुद्ध यादव, कीर्तिमान यादव, अर्जुन सिंह, कृष्ण कुमार, नदीश यादव, विपिन कुमार, रावेंद्र पंडित, अवधेश भट्ट, साधू गौतम, हरिश्चन्द्र भट्ट, रतन यादव, दिलीप सिंह व मनीष सिंह आदि श्रद्धालुओं ने सम्हाली।

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