
मुंबई। धुले जिले में पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को दी जाने वाली छात्रवृत्ति में अनियमितता के आरोप लगाए गए थे, लेकिन जांच के बाद पुलिस ने पाया कि इस मामले में कोई आपराधिक अपराध नहीं हुआ है। इसलिए इस प्रकरण में ‘बी-समरी’ दाखिल करने का निर्णय लिया गया है, यह जानकारी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में दी। धुले जिले में पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों के लिए दी जाने वाली छात्रवृत्ति निधि के संबंध में यह प्रश्न विधानसभा में विधायक अमित साटम ने उठाया था। इस चर्चा में विधायक नितिन राऊत और हरिष पिंपले ने भी भाग लिया। मंगलवार को मुख्यमंत्री फडणवीस ने बताया कि इस मामले में छात्रवृत्ति की राशि किसी भी व्यक्ति के निजी खाते में लेकर खर्च नहीं की गई। संबंधित संस्था को यह निधि दीवार निर्माण जैसे कार्यों के लिए उपयोग करने का अधिकार था। हालांकि नियमों के अनुसार यह खर्च प्रधानाचार्य के खाते से किया जाना अपेक्षित था, लेकिन वास्तव में राशि संस्था के खाते में लेकर वहीं से खर्च की गई। इसलिए यह केवल प्रक्रियात्मक अनियमितता (प्रोसीजरल लैप्स) मानी गई है। उन्होंने कहा कि पुलिस जांच में निधि के गबन या दुरुपयोग का कोई प्रमाण नहीं मिला है। इसलिए इस मामले में आपराधिक मामला दर्ज करने का प्रश्न ही नहीं उठता। चूंकि धन का कोई अपहरण नहीं हुआ है, इसलिए पुलिस ने इस मामले में ‘बी-समरी’ दाखिल करने का निर्णय लिया है। हालांकि प्रक्रियात्मक अनियमितता के संबंध में आवश्यक प्रशासनिक जांच की गई है।




