
मुंबई। मुंबई में झोपड़पट्टी पुनर्वासन प्राधिकरण (एसआरए) के आधिकारिक पत्रों को कथित तौर पर नजरअंदाज करने का मामला सामने आया है, जहां मुंबई पुलिस के निर्मल नगर पुलिस स्टेशन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। सांताक्रूज़ (पूर्व) के गोलिबार क्षेत्र में सुख सागर एसआरए परियोजना से जुड़े प्रकरण में एसआरए ने MRTP Act 1966 की धारा 53(1) के तहत डेवलपर आदर्श डेवलपर और आर्किटेक्ट टी.एन. हसन के खिलाफ कार्रवाई शुरू करते हुए 21 दिसंबर 2022 और 05 अक्टूबर 2023 को नोटिस जारी किए थे। इन नोटिसों का पालन न किए जाने पर एसआरए के कार्यकारी अभियंता ने 13 मार्च 2024 व 15 अप्रैल 2024 को निर्मल नगर पुलिस स्टेशन को औपचारिक पत्र भेजकर धारा 53(6)(बी) के तहत एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की, जिसमें स्पष्ट रूप से उल्लंघन को दंडनीय अपराध बताया गया था। इसके बावजूद, एसआरए द्वारा दो बार पत्र भेजे जाने के बाद भी पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज नहीं की गई है, जिससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या निर्मल नगर पुलिस एसआरए जैसे वैधानिक प्राधिकरण के निर्देशों को भी गंभीरता से नहीं ले रही। स्थानीय सूत्रों और कानूनी जानकारों का कहना है कि जब एक अधिकृत सरकारी संस्था खुद लिखित में कार्रवाई की मांग कर रही हो, तब भी पुलिस का निष्क्रिय रहना कानून व्यवस्था और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक, निर्मल नगर से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।इस पूरे मामले ने एसआरए परियोजनाओं में पारदर्शिता, प्रशासनिक जिम्मेदारी और पुलिस की भूमिका को लेकर नई बहस छेड़ दी है, और अब निगाहें उच्च अधिकारियों पर टिकी हैं कि वे इस मामले में क्या हस्तक्षेप करते हैं और क्या दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।




