
मुंबई। मुंबई के नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट में आयोजित ‘मैक्ससिटी लिटरेचर फेस्टिवल’ के पहले दिन की शुरुआत बेहद उत्साहपूर्ण माहौल में हुई। विभिन्न आयु वर्ग के साहित्यप्रेमियों ने बड़ी संख्या में उपस्थित रहकर प्रत्येक सत्र को जबरदस्त प्रतिसाद दिया। शनिवार को पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ महोत्सव का उद्घाटन किया गया, जिसके बाद पूरे दिन विविध विषयों पर उच्चस्तरीय और विचारोत्तेजक सत्र आयोजित किए गए। उद्घाटन सत्र “मुंबई: बिटवीन एक्यूआई एंड ड्रीम्स” में भारत घोटोसकर, लुईस मिरांडा, निधि चौधरी और आर. वेंकटेश ने मुंबई के शहरी जीवन की चुनौतियों, सपनों और वास्तविकताओं पर गहन चर्चा की। इसके बाद “हिडन एंड कोल्ड वॉर्स” सत्र में मंगेश सावंत, सचिन देवधर, संजीव चोपड़ा और विभू वैभव ने वैश्विक राजनीति के पर्दे के पीछे चल रहे संघर्षों पर प्रकाश डालते हुए श्रोताओं को सोचने पर मजबूर किया। दिन का एक विशेष आकर्षण रहे “5 असैसिनेशन्स एंड एन आर्म्स डील: द सुंदरजी स्टोरी” सत्र में प्रोबल दास गुप्ता और संदीप उन्नीथन ने 1980 के दशक की घटनाओं और ‘जनरल ब्रास्टैक्स’ पुस्तक के संदर्भ में रोचक संवाद प्रस्तुत किया। इसके बाद “बिटवीन ब्रेकपॉइंट एंड बिगिनिंग्स” सत्र में सौरभ मुखर्जी, शिंजिनी कुमार और रजनी पानीकर ने कार्यक्षेत्र, संपत्ति और महिलाओं की बदलती भूमिकाओं पर गहन चर्चा की। दोपहर के सत्र में मैरिटाइम हिस्ट्री सोसायटी द्वारा 1946 के नौसेना विद्रोह पर आधारित एक लघु फिल्म प्रस्तुत की गई। इसके बाद “1946: स्वतंत्रता का अंतिम युद्ध” विषय पर आयोजित चर्चा में प्रमोद कपूर, कमोडोर श्रीकांत केसनूर और संदीप उन्नीथन ने भाग लिया। इस चर्चा में भारत के स्वतंत्रता संग्राम के एक महत्वपूर्ण लेकिन कम चर्चित अध्याय पर प्रकाश डाला गया। इतिहास प्रेमियों के लिए “द माइटी चोलाज” सत्र में अमीश त्रिपाठी, एस. कृष्णन और डॉ. कजारी कमल ने चोल साम्राज्य के गौरवशाली इतिहास को प्रस्तुत किया। पहले दिन का समापन वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन, फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, वेस्टर्न नेवल कमांड के प्रेरणादायी ‘फायरसाइड चैट’ के साथ हुआ। कुल मिलाकर, विचारोत्तेजक चर्चाओं, विविध विषयों की समृद्ध प्रस्तुति और बड़ी संख्या में सहभागिता के चलते ‘मैक्ससिटी लिटरेचर फेस्टिवल’ का पहला दिन सफल रहा और आगामी सत्रों के प्रति उत्सुकता और भी बढ़ गई है।




