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2012 अग्निकांड मामले में बड़ी राहत: सेशन कोर्ट ने जॉली मेकर सोसायटी और पूर्व पदाधिकारियों को किया बरी

मुंबई। मुंबई की सेशन कोर्ट ने वर्ष 2012 में हुई आग की घटना से जुड़े मामले में जॉली मेकर-1 प्रिमाइसेस को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी लिमिटेड और उसके दो पूर्व पदाधिकारियों सहित अन्य आरोपियों को बड़ी राहत देते हुए बरी कर दिया है। अदालत ने माना कि अग्निशमन विभाग ने अभियोजन शुरू करने से पहले कानून में निर्धारित अनिवार्य प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया था, जिसके कारण पूरा अभियोजन ही टिक नहीं पाया। यह मामला 2 दिसंबर 2012 की तड़के करीब 3:30 बजे का है, जब सोसायटी की 19वीं मंजिल पर स्थित एक फ्लैट में कथित तौर पर शॉर्ट सर्किट के कारण आग लग गई थी। हादसे में किसी की जान नहीं गई, जबकि लगभग 28 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था। घटना के बाद मुंबई फायर ब्रिगेड ने निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट में आरोप लगाया था कि सोसायटी ने अग्निशमन उपकरणों का समुचित रखरखाव नहीं किया। साथ ही जनवरी और जुलाई 2012 में लाइसेंस प्राप्त एजेंसी से प्राप्त आवश्यक प्रमाणपत्र मुख्य अग्निशमन अधिकारी को जमा नहीं किए गए। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अग्निशमन विभाग को सूचना दिए बिना मैनुअल कॉल प्वाइंट और फायर अलार्म सिस्टम हटा दिए गए थे, जिससे आग बुझाने में देरी हुई। रिपोर्ट के आधार पर सोसायटी को नोटिस जारी किया गया और जवाब मांगा गया। जवाब असंतोषजनक मानते हुए अग्निशमन विभाग ने महानगर दंडाधिकारी (मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट) अदालत में आपराधिक शिकायत दर्ज कराई। मजिस्ट्रेट अदालत ने आरोप तय करने के लिए नोटिस जारी किया और आरोपमुक्त करने की याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद सोसायटी और उसके पूर्व पदाधिकारियों—लक्ष्मण अग्रवाल, भवनेश साहनी, ताहेर अदेंवाला, परमिंदर कुलदीप ओबेरॉय, पिशु मेहतानी और महेश लालवानी—ने सेशन कोर्ट का रुख किया। उन्होंने दलील दी कि घटना के समय अग्निशमन प्रणाली पूरी तरह कार्यशील थी, अधिकारियों की गवाही में विरोधाभास था और निरीक्षण भी निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना किया गया। सेशन कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि अग्निशमन विभाग अभियोजन शुरू करने से पहले आवश्यक कानूनी औपचारिकताओं का पालन करने में विफल रहा। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यह मामला आग लगने या जनहानि का नहीं, बल्कि अग्निशमन नियमों के कथित उल्लंघन का था। ऐसे मामलों में कानूनी प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है, लेकिन अभियोजन पक्ष आवश्यक साक्ष्य और वैधानिक औपचारिकताओं को रिकॉर्ड पर लाने में असफल रहा। इन्हीं आधारों पर अदालत ने जॉली मेकर-1 प्रिमाइसेस को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी और उसके पूर्व पदाधिकारियों को आरोपों से बरी कर दिया। यह फैसला अग्निशमन नियमों से जुड़े मामलों में कानूनी प्रक्रिया के पालन की अनिवार्यता को रेखांकित करने वाला महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।

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