
मुंबई। महाराष्ट्र में नागरिकों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण रक्त एवं रक्त घटक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफ़डीए) ने रक्त केंद्रों और रक्त भंडारण केंद्रों पर निगरानी तेज कर दी है। अप्रैल से जून 2026 के दौरान नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर 21 रक्त केंद्रों और 13 रक्त भंडारण केंद्रों के लाइसेंस निलंबित किए गए, जबकि 2 रक्त केंद्रों और 2 रक्त भंडारण केंद्रों के लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द कर दिए गए। राज्य में वर्तमान में 413 लाइसेंसधारी रक्त केंद्र और 468 लाइसेंसधारी रक्त भंडारण केंद्र संचालित हैं। औषधि एवं प्रसाधन अधिनियम, 1940 तथा उसके अंतर्गत बनाए गए नियमों के अनुसार इन सभी केंद्रों का हर साल अनिवार्य निरीक्षण किया जाता है। इसके अलावा एफ़डीए द्वारा आकस्मिक जांच भी की जाती है। सोमवार को एफ़डीए से मिली जानकारी के अनुसार रक्त संग्रह, रक्त की जांच, रक्त घटकों का पृथक्करण, भंडारण, तापमान नियंत्रण, गुणवत्ता नियंत्रण, प्रशिक्षित कर्मचारियों की उपलब्धता, आवश्यक उपकरण, अभिलेखों का रखरखाव और जैव चिकित्सा कचरा प्रबंधन सहित विभिन्न मानकों का पालन करना रक्त केंद्रों के लिए अनिवार्य है। अप्रैल से जून 2026 के दौरान की गई जांच में कई केंद्रों पर लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन, निर्धारित मानकों का पालन नहीं करने, गुणवत्ता प्रबंधन में खामियां और अभिलेखों में विसंगतियां पाए जाने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई की।
गंभीर उल्लंघन पर 4 लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द
एफ़डीए ने गंभीर उल्लंघन पाए जाने के बाद बोरी पारधी, पुणे स्थित पाटील हॉस्पिटल ब्लड स्टोरेज सेंटर और भिवंडी, ठाणे स्थित आधार ब्लड स्टोरेज सेंटर (ट्रस्ट) के लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द कर दिए। इसी तरह जून 2026 में प्राप्त शिकायतों के आधार पर की गई जांच के दौरान माया ब्लड सेंटर में औषधि एवं प्रसाधन अधिनियम, 1940 और संबंधित नियमों के गंभीर उल्लंघन पाए गए। इसके बाद सक्षम प्राधिकारी ने रक्त केंद्र का लाइसेंस रद्द करने का आदेश दिया। मुंबई स्थित सर जे.जे. महानगर रक्त केंद्र की जांच में भी लाइसेंस की शर्तों और लागू नियमों के उल्लंघन सामने आने के बाद प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए उसका लाइसेंस रद्द कर दिया गया। एफ़डीए ने स्पष्ट किया है कि रक्त संग्रह, उसकी प्रक्रिया और वितरण केवल व्यावसायिक गतिविधि नहीं, बल्कि मानव जीवन बचाने वाली अत्यावश्यक सेवा है। रक्त और रक्त घटकों का अन्य औषधियों की तरह उत्पादन नहीं किया जा सकता, इसलिए व्यावसायिक हितों के लिए नियमों का उल्लंघन करने और मरीजों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले किसी भी रक्त केंद्र या रक्त भंडारण केंद्र को बख्शा नहीं जाएगा।
खाद्य एवं औषधि प्रशासन के आयुक्त तुकाराम मुंढे ने कहा- रक्त कोई सामान्य औषधि नहीं, बल्कि जीवनावश्यक तत्व है। नागरिकों को सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और निर्धारित मानकों के अनुसार रक्त एवं रक्त घटक उपलब्ध कराना एफ़डीए की सर्वोच्च जिम्मेदारी है। नियमों का उल्लंघन करने वाले रक्त केंद्रों और रक्त भंडारण केंद्रों पर लगातार निगरानी रखकर सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा के लिए प्रशासन प्रतिबद्ध है। एफ़डीए ने कहा है कि राज्यभर के रक्त केंद्रों और रक्त भंडारण केंद्रों की नियमित एवं आकस्मिक जांच भविष्य में भी अधिक प्रभावी तरीके से जारी रहेगी और नियमों का उल्लंघन करने वाली संस्थाओं के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।



