महाराष्ट्र में FDA का बड़ा एक्शन: 20.23 करोड़ का दवा स्टॉक जब्त या प्रतिबंधित, 1,581 लाइसेंस रद्द-निलंबित

दवा निर्माण और बिक्री प्रतिष्ठानों की जांच में 4.6 गुना वृद्धि, 4,723 प्रतिष्ठानों की जांच, 35 एफआईआर दर्ज, 15 गिरफ्तार

मुंबई। महाराष्ट्र में नकली, घटिया और बिना लाइसेंस दवाओं के कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए खाद्य एवं औषध प्रशासन (एफडीए) ने जांच और कार्रवाई तेज कर दी है। बुधवार को एफ़डीए से मिली जानकारी के अनुसार अप्रैल से सितंबर 2026 के छह महीनों के दौरान विभाग ने दवा निर्माण और बिक्री से जुड़े 4,723 प्रतिष्ठानों की जांच की। इस अवधि में 354 लाइसेंस रद्द किए गए, जबकि 1,227 लाइसेंस निलंबित किए गए। इसके अलावा 123 तलाशी एवं जब्ती कार्रवाइयों में करीब 20.23 करोड़ रुपये मूल्य का दवा स्टॉक जब्त किया गया या उसकी बिक्री पर रोक लगाई गई। एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे के अनुसार, नागरिकों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दवाओं की गुणवत्ता, निर्माण प्रक्रिया, भंडारण, बिक्री की वैधता और नियमों के पालन की लगातार जांच की जा रही है।
चार महीनों में जांच की रफ्तार 4.6 गुना बढ़ी
विभाग के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल और मई 2026 के दौरान दवा निर्माण प्रतिष्ठानों की 120 तथा बिक्री प्रतिष्ठानों की 347 जांच की गई थीं। इस प्रकार दो महीनों में कुल 467 जांच हुईं और मासिक औसत लगभग 234 रहा। वहीं, जून से सितंबर 2026 के चार महीनों में निर्माण प्रतिष्ठानों की 965 और बिक्री प्रतिष्ठानों की 3,291 जांच की गईं। इस अवधि में कुल 4,256 जांच हुईं और मासिक औसत बढ़कर 1,064 हो गया। इस तरह मासिक औसत के आधार पर जांच की संख्या लगभग 4.6 गुना बढ़ी। जांच लक्ष्य की पूर्ति का प्रतिशत भी अप्रैल-मई के लगभग 29 प्रतिशत से बढ़कर जून-सितंबर में 131 प्रतिशत तक पहुंच गया।
1,681 नोटिस, 354 लाइसेंस रद्द
अप्रैल से सितंबर के बीच एफडीए ने दवा निर्माण प्रतिष्ठानों को 273 और बिक्री प्रतिष्ठानों को 1,408 नोटिस जारी किए। इस प्रकार कुल 1,681 नोटिस दिए गए। इसी अवधि में निर्माण प्रतिष्ठानों के 86 और बिक्री प्रतिष्ठानों के 268 लाइसेंस रद्द किए गए। इसके अलावा निर्माण प्रतिष्ठानों के 133 तथा बिक्री प्रतिष्ठानों के 1,094 लाइसेंस निलंबित किए गए। जून से सितंबर के चार महीनों में ही 1,402 नोटिस जारी किए गए, 288 लाइसेंस रद्द और 856 लाइसेंस निलंबित किए गए।
बिना लाइसेंस दवाओं से लेकर नकली कॉस्मेटिक्स तक कार्रवाई
जून से सितंबर के दौरान एफडीए ने 115 तलाशी एवं जब्ती कार्रवाइयां कीं। इनमें लगभग 19.11 करोड़ रुपये मूल्य का दवा स्टॉक जब्त किया गया या उसकी बिक्री प्रतिबंधित की गई। इस दौरान 33 एफआईआर दर्ज हुईं और 14 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
इन कार्रवाइयों में बिना लाइसेंस दवाओं का भंडारण और बिक्री से जुड़े 43 मामले, दवाओं के संबंध में आपत्तिजनक विज्ञापनों के 31 मामले, नकली दवाओं एवं सौंदर्य प्रसाधनों के 14 मामले तथा गलत ब्रांडिंग वाले सौंदर्य प्रसाधनों के 10 मामले शामिल हैं।
इसके अलावा नशीली दवाओं के दुरुपयोग से संबंधित एनडीपीएस कानून के तहत नौ कार्रवाइयां, चिकित्सा उपकरणों से जुड़े तीन मामले, भ्रामक रूप से मिलते-जुलते ब्रांड नामों के तीन मामले और लेबल संबंधी उल्लंघन के दो मामले सामने आए।
तलाशी और जब्ती की कार्रवाई में भी तेजी
एफडीए के अनुसार, अप्रैल-मई में आठ तलाशी एवं जब्ती कार्रवाइयों के तहत लगभग 1.12 करोड़ रुपये मूल्य का स्टॉक जब्त या प्रतिबंधित किया गया था। इसके मुकाबले जून-सितंबर में 115 कार्रवाइयों के दौरान यह राशि बढ़कर 19.11 करोड़ रुपये पहुंच गई। मासिक औसत के आधार पर तलाशी एवं जब्ती की कार्रवाइयों में लगभग 7.2 गुना, एफआईआर दर्ज होने की संख्या में लगभग 8.2 गुना और जब्त या प्रतिबंधित माल के मूल्य में करीब 8.5 गुना वृद्धि दर्ज की गई।
नकली और घटिया दवाओं के खिलाफ अभियान जारी रहेगा: तुकाराम मुंढे
एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने कहा कि नागरिकों के स्वास्थ्य की रक्षा करना खाद्य एवं औषध प्रशासन की मूलभूत जिम्मेदारी है। पिछले चार महीनों में जांच और प्रवर्तन कार्रवाइयों में हुई वृद्धि विभाग की सक्रियता को दर्शाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नकली, घटिया और बिना लाइसेंस दवाएं बाजार में न पहुंचें, इसके लिए राज्यभर में जांच अभियान और व्यापक किया जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।

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