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मुंबई एयरपोर्ट पर डीआरआई का बड़ा एक्शन, ₹7.50 करोड़ का तस्करी का सोना जब्त, 6 गिरफ्तार

मुंबई। डायरेक्टरेट ऑफ़ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (डीआरआई) ने गुरुवार को छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (CSMIA) पर कार्रवाई करते हुए अंतरराष्ट्रीय सोना तस्करी सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में फिलीपींस के तीन नागरिकों समेत कुल छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि एयरपोर्ट परिसर में कार्यरत कुछ निजी कर्मचारियों की मिलीभगत से दुबई और बैंकॉक से ट्रांज़िट यात्रियों के माध्यम से सोने की तस्करी की जा रही थी। गिरफ्तार आरोपियों में भांडुप निवासी हिमांशु उपाध्याय (25), कुर्ला निवासी मोहिद हसन सिद्दीकी (32), फिरोज़ सैयद (47) तथा फिलीपींस के नागरिक लाकिम अलीमुदीन नासेर (35), बेनी लॉयड ओलिवो (35) और क्रिस्टीन जॉय अंदाया पोर्नास्डोरो (35) शामिल हैं। डीआरआई के अनुसार, गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए अधिकारियों ने हिमांशु उपाध्याय को एयरपोर्ट परिसर में मोहिद सिद्दीकी को दो काले पाउच सौंपते हुए पकड़ा। पूछताछ में उपाध्याय ने बताया कि ये पाउच उसे इंटरनेशनल डिपार्चर हॉल में स्टोर मैनेजर के रूप में कार्यरत फिरोज़ सैयद ने दिए थे। पाउच में मोम (वैक्स) के रूप में छिपाकर रखा गया सोने का बुरादा (गोल्ड डस्ट) था। इसके बाद जांच में ट्रांज़िट यात्री लाकिम अलीमुदीन नासेर की पहचान हुई। आगे की पूछताछ में फिरोज़ सैयद ने बताया कि दो अन्य ट्रांज़िट यात्री भी अगली खेप की डिलीवरी के लिए एयरपोर्ट के ट्रांज़िट क्षेत्र में मौजूद थे। डीआरआई ने दोनों विदेशी नागरिकों को पकड़कर उनके पास से भी वैक्स में छिपाए गए समान पाउच बरामद किए। अधिकारियों ने कुल 5,251 ग्राम वजन की चार सोने की छड़ें जब्त कीं, जिनकी अनुमानित बाजार कीमत करीब ₹7.50 करोड़ बताई गई है। पूछताछ में भारतीय आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे एक बड़े तस्करी सिंडिकेट के निर्देश पर काम कर रहे थे। जांच के अनुसार, फिरोज़ सैयद ट्रांज़िट यात्रियों से सोना लेकर हिमांशु उपाध्याय को सौंपता था, जो आगे उसे एयरपोर्ट के बाहर पहुंचाने के लिए मोहिद सिद्दीकी को देता था। वहीं, गिरफ्तार विदेशी नागरिकों के वकील प्रभाकर त्रिपाठी ने दावा किया कि उनके मुवक्किल केवल अंतरराष्ट्रीय ट्रांज़िट यात्री थे और उन्होंने भारत में प्रवेश नहीं किया था तथा न ही इमिग्रेशन प्रक्रिया पूरी की थी। उनका कहना है कि ऐसे में भारत में तस्करी के आरोप की वैधता न्यायिक जांच का विषय है और इस संबंध में अदालत के समक्ष उचित कानूनी दलीलें प्रस्तुत की जाएंगी। फिलहाल डीआरआई पूरे तस्करी नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

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