
मुंबई। कार्यस्थल पर महिलाओं को यौन उत्पीड़न से सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से लागू POSH (Prevention of Sexual Harassment) अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने व्यापक अभियान शुरू किया है। महिला एवं बाल विकास विभाग के आयुक्त डॉ. जगदीश मिनीयार ने निर्देश दिए हैं कि राज्यभर में 12 संवर्गों के 4,000 से अधिक अधिकारी सरकारी तथा निजी संस्थानों में कानून के अनुपालन की तत्काल जांच करें। गुरुवार को डॉ. मिनीयार की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित बैठक में जिलाधिकारी, जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी, बाल विकास परियोजना अधिकारी, माविम के जिला समन्वय अधिकारी, आंगनवाड़ी पर्यवेक्षिका, मुख्य सेविका सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में निर्देश दिए गए कि जिन सभी सरकारी एवं निजी संस्थानों में 10 या उससे अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं, वहां POSH अधिनियम के तहत आंतरिक शिकायत समिति (Internal Complaints Committee – ICC) का गठन अनिवार्य रूप से हुआ है या नहीं, इसकी जांच की जाए। साथ ही, 10 से कम कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों का भी सर्वेक्षण किया जाए, ताकि महिलाओं की सुरक्षा से संबंधित कानून का व्यापक स्तर पर पालन सुनिश्चित किया जा सके। आयुक्त ने स्पष्ट किया कि जिन कार्यालयों या संस्थानों में अधिनियम का उचित पालन नहीं पाया जाएगा, उनके खिलाफ POSH अधिनियम की धारा 26 के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी विभागाध्यक्षों से भी अपील की है कि वे अपने अधीनस्थ सरकारी और निजी कार्यालयों में इस कानून की प्रभावी अनुपालना सुनिश्चित करें। महिला एवं बाल विकास विभाग के अनुसार, केंद्र सरकार के ‘शी-बॉक्स’ (SHe-Box) पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों के आधार पर महाराष्ट्र, POSH कानून के क्रियान्वयन के मामले में देश के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अग्रणी राज्यों में शामिल है। विभाग ने कहा है कि महिलाओं के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक कार्यस्थल उपलब्ध कराने की दिशा में राज्य सरकार प्रतिबद्ध है तथा POSH अधिनियम के प्रभावी पालन के लिए नियमित निरीक्षण, निगरानी और आवश्यक कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।



