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विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में अंतरराष्ट्रीय सहयोग अहम, महावाणिज्य दूतों की भूमिका महत्वपूर्ण : राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा

मुंबई। महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा और प्रभाव में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है तथा ‘विकसित भारत 2047’ के राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने में अंतरराष्ट्रीय समुदाय, भारतीय प्रवासी और राजनयिक प्रतिनिधि महत्वपूर्ण साझेदार बनकर उभरे हैं। उन्होंने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत बनाने में महावाणिज्य दूतों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। बुधवार को मुंबई के बॉम्बे जिमखाना में गेट वे हाउस द्वारा आयोजित विभिन्न देशों के महावाणिज्य दूतों की वार्षिक बैठक को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भारतीय अवधारणा विभिन्न देशों के राजनयिक प्रतिनिधियों की उपस्थिति में साकार होती दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि मुंबई का कॉन्सुलर समुदाय व्यापार, निवेश, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, पर्यटन, वीजा सुविधाओं और जनसंपर्क को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। राज्यपाल ने कहा कि मुंबई लंबे समय से वैश्विक महत्व का शहर रहा है और महाराष्ट्र देश का अग्रणी औद्योगिक राज्य, नवाचार एवं उद्यमिता का केंद्र तथा विदेशी निवेश के लिए आकर्षक गंतव्य बन चुका है। इसी कारण अनेक देशों ने यहां अपने राजनयिक और वाणिज्यिक कार्यालय स्थापित किए हैं। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र ने हमेशा भारत और दुनिया के बीच संपर्क सेतु की भूमिका निभाई है तथा विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों, प्रधानमंत्रियों, मंत्रियों और राजनयिकों की यात्राओं ने आर्थिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग को नई दिशा दी है।उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र सरकार ने राजनयिक समुदाय के साथ संवाद को और अधिक सुगम बनाने तथा व्यापार और निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए एक स्वतंत्र प्रोटोकॉल विभाग की स्थापना की है। इससे वैश्विक भागीदारी को बढ़ावा मिलेगा और निवेशकों को महाराष्ट्र एक अधिक स्वागतशील एवं उत्तरदायी राज्य के रूप में दिखाई देगा।विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति के रूप में अपनी भूमिका का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने वैश्विक शैक्षणिक सहयोग को विशेष महत्व देने की बात कही। उन्होंने विभिन्न देशों के विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों से महाराष्ट्र के उच्च शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता कार्यक्रमों में भागीदारी का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राज्य के विश्वविद्यालय, अनुसंधान संस्थान और प्रौद्योगिकी केंद्र विश्वस्तरीय शिक्षा और शोध के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान कर रहे हैं।महाराष्ट्र की पर्यटन क्षमता का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि इतिहास, संस्कृति, अध्यात्म, प्राकृतिक सौंदर्य और आधुनिक विकास का अनूठा संगम राज्य को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर विशेष स्थान दिला सकता है। उन्होंने विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों से महाराष्ट्र के पर्यटन स्थलों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देने का आग्रह किया।राज्यपाल ने व्यापार, निवेश, शिक्षा, पर्यटन, नवाचार, संस्कृति और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में महाराष्ट्र और विश्व के विभिन्न देशों के बीच सहयोग को और अधिक मजबूत बनाने के लिए सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया।कार्यक्रम में मनजीत कृपलानी ने संस्था की गतिविधियों की जानकारी दी, जबकि बेहराम वकील ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

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