IIT बॉम्बे छात्र मौत विवाद: शमा मोहम्मद ने दी सफाई, बोलीं- ‘दलितों के खिलाफ एक शब्द नहीं कहा’

साहिल वाकोडे की मौत के बाद प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला के समर्थन पर घिरीं कांग्रेस प्रवक्ता, कहा- मेरी टिप्पणी सिर्फ परीक्षा में नकल और इनविजिलेटर के अधिकार को लेकर थी

मुंबई। IIT बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की मौत के बाद प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला के समर्थन में दिए बयान को लेकर आलोचनाओं का सामना कर रहीं कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. शमा मोहम्मद ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि उनकी टिप्पणी दलित समुदाय के खिलाफ नहीं थी और उन्होंने केवल परीक्षा के दौरान कथित नकल की स्थिति में इनविजिलेटर के अधिकार की बात की थी। शमा मोहम्मद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि उन्होंने दलितों के खिलाफ कोई टिप्पणी नहीं की। उनका कहना था कि यदि कोई विद्यार्थी परीक्षा में नकल करते पकड़ा जाता है तो निरीक्षक को उसे डांटने का अधिकार है और परीक्षा में नकल की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी छात्र के खिलाफ जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल होता है या जाति के आधार पर उत्पीड़न किया जाता है तो उसकी शिकायत संस्थान की संबंधित SC/ST व्यवस्था में की जानी चाहिए। आलोचनाओं के बीच मोहम्मद ने कहा कि उनकी बात को जाति-आधारित उत्पीड़न के आरोपों के विरोध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह विवाद IIT बॉम्बे के बीटेक छात्र साहिल वाकोडे की 18 सितंबर को हुई मौत के बाद शुरू हुआ। IIT बॉम्बे के अनुसार, मध्यावधि परीक्षा के दौरान वाकोडे के पास मोबाइल फोन मिला था और उन पर प्रश्नपत्र को AI प्लेटफॉर्म पर अपलोड करने का आरोप लगा था। हालांकि छात्र के परिवार ने जाति-आधारित उत्पीड़न और मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं। संस्थान ने जातिगत भेदभाव के आरोपों से इनकार किया है। मामले में प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला का नाम FIR में दर्ज किया गया है और जांच मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंपी गई है। मामले को लेकर IIT बॉम्बे फैकल्टी फोरम प्रोफेसर डूला के समर्थन में सामने आया है। फोरम का कहना है कि परीक्षा के दौरान उन्होंने संस्थान की स्वीकृत अकादमिक प्रक्रिया के तहत अपनी जिम्मेदारी निभाई। दूसरी ओर, छात्र प्रदर्शन कर निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। इस बीच IIT बॉम्बे ने प्रोफेसर डूला की डीन ऑफ एडमिनिस्ट्रेटिव अफेयर्स की जिम्मेदारी तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दी है। संस्थान ने साहिल की मौत के बाद जारी अपने पहले संचार के लिए भी खेद जताते हुए कहा है कि मामले की परिस्थितियों की जांच अभी जारी है और जांच से पहले घटनाओं को निश्चित रूप से प्रस्तुत करना उचित नहीं था। शमा मोहम्मद ने इससे पहले प्रोफेसर डूला का समर्थन करते हुए कहा था कि परीक्षा में नकल करते पाए जाने पर किसी विद्यार्थी को डांटना अनुशासन की सामान्य प्रक्रिया है। साथ ही उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों में विद्यार्थियों की मानसिक सेहत के लिए पेशेवर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ उपलब्ध कराने की जरूरत भी बताई थी। साहिल वाकोडे की मौत को लेकर परिवार के आरोप, संस्थान का पक्ष और परीक्षा के दौरान हुई घटनाओं का वास्तविक क्रम अब जांच का विषय है। पुलिस जांच पूरी होने से पहले जातिगत उत्पीड़न या आत्महत्या के लिए उकसाने संबंधी आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकला है।

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