
मुंबई। सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) ने इगतपुरी फर्जी कॉल सेंटर सिंडिकेट मामले की जांच का दायरा बढ़ाते हुए एक जटिल वित्तीय नेटवर्क का खुलासा किया है। जांच में कई संदिग्ध ‘शेल फर्मों’ (कागजी कंपनियों) का पता चला है, जिनके महाराष्ट्र पुलिस के दो वरिष्ठ अधिकारियों से कथित संबंध होने की आशंका जताई जा रही है। जांच एजेंसी के अनुसार, ठाणे और नवी मुंबई में फैली पांच से अधिक संस्थाओं के एक समूह की पहचान की गई है, जो कथित तौर पर अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी से अर्जित धन की लॉन्ड्रिंग और उसे छिपाने का माध्यम थीं। ये कंपनियां कंसल्टेंसी, लॉजिस्टिक्स और रिटेल साझेदारी के नाम पर संचालित हो रही थीं। सूत्रों के मुताबिक, सीबीआई दो आईपीएस रैंक के अधिकारियों और उनके अधीनस्थों की भूमिका की गहन जांच कर रही है। आरोप है कि इन अधिकारियों ने इस सिंडिकेट को “सुरक्षा कवच” प्रदान किया और बदले में मिलने वाली कथित “प्रोटेक्शन मनी” को इन फर्मों के जरिए घुमाया गया। जांच में सामने आया है कि इन कंपनियों में कई समान संदिग्ध पैटर्न पाए गए हैं—जैसे अधिकारियों के परिजनों का साझेदार के रूप में शामिल होना, एक ही या संदिग्ध पते, बेहद कम पूंजी निवेश और सार्वजनिक वित्तीय जानकारी का अभाव। विशेषज्ञों के अनुसार, ये संकेत आमतौर पर उन संरचनाओं में देखे जाते हैं, जिनका उपयोग अवैध धन को छिपाने के लिए किया जाता है। जांच के दायरे में आई एक लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप (एलएलपी), जो नवंबर 2019 में ठाणे के माजिवड़ा क्षेत्र के एक आवासीय पते पर पंजीकृत हुई थी, विशेष रूप से संदेह के घेरे में है। महज ₹1 लाख की पूंजी वाली इस फर्म का संचालन दो नामित साझेदारों द्वारा किया जा रहा था, जिनमें एक पुलिस अधिकारी का पुत्र और दूसरे एक आईजी-रैंक अधिकारी की पुत्री शामिल है। संबंधित अधिकारी पहले से ही एक अन्य फर्जी कॉल सेंटर रैकेट और अशोक खरात प्रकरण में जांच के दायरे में बताए जा रहे हैं। सीबीआई के अनुसार, यह फर्म वर्तमान में बंद होने की प्रक्रिया में है, जबकि इसके वित्तीय रिकॉर्ड सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं। पिछले पांच वर्षों में इसने कोई वित्तीय जानकारी साझा नहीं की, जिससे इसकी वास्तविक गतिविधियों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जांच एजेंसी इसे संभावित ‘शेल कंपनी’ मानकर इसकी गहन जांच कर रही है। इसके अलावा, नवी मुंबई में पंजीकृत एक अन्य कंपनी, जिसे संचार उपकरण निर्माण श्रेणी में रखा गया है, के बारे में भी हालिया वित्तीय या व्यावसायिक गतिविधियों का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं मिला है। यह कंपनी भी उसी समूह से जुड़ी बताई जा रही है, जिससे नेटवर्क के आपसी संबंधों पर संदेह और गहरा हो गया है। इसी क्रम में, 2021 में स्थापित दो अन्य संस्थाएं—एक प्राइवेट कंपनी और एक एलएलपी—ठाणे के कोलबाद रोड पर एक ही पते से संचालित पाई गई हैं। इनका स्वामित्व भी एक ही समूह के पास है, जिसमें एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का बेटा और एक रिश्तेदार शामिल है। हालांकि इन्हें ऑटोमोबाइल ट्रेडिंग से जुड़ा बताया गया है, लेकिन इनके सक्रिय व्यवसाय का कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया है। सीबीआई अब इन सभी संस्थाओं के बीच मालिकाना ढांचे, पते के इतिहास और वित्तीय लेन-देन के संबंधों की जांच कर रही है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि क्या ये कंपनियां साइबर धोखाधड़ी से अर्जित धन को कई खातों और अधिकार क्षेत्रों में घुमाने का माध्यम थीं। एजेंसी यह भी जांच रही है कि क्या इस नेटवर्क का उपयोग जबरन वसूली से जुड़े पैसों के प्रबंधन के लिए भी किया गया।




