
पांचवीं कक्षा से पढ़ाया जाएगा नशे के खिलाफ पाठ, स्कूल-कॉलेज होंगे ‘ड्रग फ्री कैंपस’; हर साल चुना जाएगा नशामुक्त उत्कृष्ट जिला
मुंबई। महाराष्ट्र को वर्ष 2029 तक पूरी तरह नशामुक्त बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मंगलवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में राज्य से मादक पदार्थों के समूल उन्मूलन के लिए तैयार व्यापक नीति को मंजूरी दे दी गई। इसके तहत नशीले पदार्थों के उत्पादन, परिवहन, बिक्री और सेवन के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ बड़े पैमाने पर जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा। सरकार का दावा है कि ग्राम स्तर से लेकर जिला, संभाग और मंत्रालय स्तर तक अलग-अलग विभागों की जिम्मेदारी तय कर इस तरह का व्यापक नशामुक्ति अभियान लागू करने वाला महाराष्ट्र देश का पहला राज्य है। नीति के क्रियान्वयन में राज्य सरकार के लगभग सभी संबंधित विभागों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। केंद्र सरकार ने विभिन्न केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित कर 2029 तक देश से मादक पदार्थों के उन्मूलन का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसी के तहत राष्ट्रीय स्तर पर ‘नशामुक्त भारत अभियान’ चलाया जा रहा है। महाराष्ट्र सरकार ने इस लक्ष्य को आगे बढ़ाते हुए राज्य के लिए ‘समग्र शासकीय दृष्टिकोण’ पर आधारित नीति तैयार की है।
ड्रग्स की खेती से लेकर बिक्री और सेवन तक होगी कार्रवाई
नई नीति के तहत अवैध मादक पदार्थों के उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली फसलों की खेती और रोपण से लेकर प्राकृतिक एवं सिंथेटिक ड्रग्स के उत्पादन, परिवहन, बिक्री और सेवन तक पूरी श्रृंखला पर कार्रवाई की जाएगी। अभियान को प्रभावी बनाने के लिए सभी संबंधित सरकारी विभागों को एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) के साथ समन्वय बनाकर काम करना होगा। मंत्रालय स्तर पर प्रत्येक विभाग में उपसचिव स्तर के अधिकारी को नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा।
पांचवीं कक्षा से नशे के खिलाफ पढ़ाया जाएगा पाठ
सरकार ने बच्चों को कम उम्र से ही नशीले पदार्थों के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने का फैसला किया है। अगले शैक्षणिक वर्ष यानी 2027 से कक्षा पांचवीं के पाठ्यक्रम में मादक पदार्थों के खिलाफ जागरूकता से संबंधित कम से कम एक पाठ शामिल किया जाएगा। ‘मुख्यमंत्री माझी शाळा, सुंदर शाळा’ अभियान के तीसरे चरण में नशा विरोधी जागरूकता गतिविधियां चलाने वाले स्कूलों को अतिरिक्त अंक दिए जाएंगे। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग को सभी शैक्षणिक संस्थानों के परिसरों को ‘ड्रग फ्री कैंपस’ बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाने की जिम्मेदारी दी गई है।
हर साल मिलेगा ‘नशामुक्त उत्कृष्ट जिला’ पुरस्कार
गांवों को भी अभियान से जोड़ने के लिए ‘मुख्यमंत्री समृद्ध पंचायतराज अभियान’ और ‘माझं गाव, आरोग्य संपन्न गाव’ अभियान में नशा विरोधी गतिविधियों के लिए अतिरिक्त अंक दिए जाएंगे। राज्य सरकार प्रत्येक वर्ष 26 जून को ‘नशामुक्त उत्कृष्ट जिला’ पुरस्कार की घोषणा करेगी। इसके लिए संबंधित जिलों द्वारा 2 अक्टूबर से 30 अप्रैल के बीच नशामुक्ति की दिशा में किए गए कार्यों का मूल्यांकन किया जाएगा।
चार स्तंभों पर काम करेगी सरकार
सरकार ने इस नीति के लिए चार प्रमुख स्तंभ निर्धारित किए हैं—मादक पदार्थों के खिलाफ प्रभावी कानून प्रवर्तन, ड्रग्स की आपूर्ति में तेजी से कमी, मादक पदार्थों की मांग में प्रभावी कमी तथा नशामुक्ति, उपचार एवं पुनर्वास। कानून के प्रभावी क्रियान्वयन की जिम्मेदारी गृह, परिवहन, बंदरगाह तथा विधि एवं न्याय विभाग को दी गई है। ड्रग्स की आपूर्ति रोकने के लिए राजस्व, कृषि और वन विभाग काम करेंगे। सिंथेटिक और कृत्रिम रूप से तैयार किए जाने वाले अवैध मादक पदार्थों के खिलाफ खाद्य एवं औषध प्रशासन (एफ़डीए) और उद्योग विभाग को कार्रवाई की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं नशीले पदार्थों की मांग कम करने के लिए स्कूली शिक्षा, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा, खेल, ग्राम विकास, सार्वजनिक स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, कौशल एवं उद्यमिता तथा सूचना एवं जनसंपर्क विभाग मिलकर काम करेंगे। नशे की गिरफ्त में आ चुके लोगों के उपचार, नशामुक्ति और पुनर्वास की जिम्मेदारी सामाजिक न्याय एवं विशेष सहायता, सार्वजनिक स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा, नगर विकास तथा कौशल, रोजगार, उद्यमिता एवं नवाचार विभागों को दी गई है। सरकार का लक्ष्य केवल ड्रग्स के खिलाफ पुलिस कार्रवाई तक सीमित रहने के बजाय स्कूल से गांव और अस्पताल से मंत्रालय तक एक समन्वित व्यवस्था खड़ी करना है। इसके जरिए 2029 तक महाराष्ट्र को मादक पदार्थों से मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है।

