
मुंबई। देश में तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण पैदा हो रही चुनौतियों का सामना करने के लिए अखिल भारतीय स्थानीय स्वशासन संस्थान को भविष्य के शहरी प्रशासन के क्षेत्र में उत्कृष्टता के राष्ट्रीय केंद्र के रूप में विकसित होने का लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए। मंगलवार को राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने मुंबई के अंधेरी स्थित संस्थान के सभागार में आयोजित दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही। वर्ष 1926 में स्थापित अखिल भारतीय स्थानीय स्वशासन संस्थान इस वर्ष अपना शताब्दी वर्ष मना रहा है। राज्यपाल ने शहरी प्रशासन, स्थानीय स्वशासन, क्षमता निर्माण, कौशल विकास और सामाजिक विकास के क्षेत्र में संस्थान के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि शहरों की लगातार बढ़ती आबादी और बदलती जरूरतों के कारण स्थानीय स्वशासन संस्थाओं के साथ ही उनमें कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी भी बढ़ी है। राज्यपाल ने कहा कि भारत में तेजी से शहरीकरण हो रहा है। देश के शहर आर्थिक विकास, नवाचार और रोजगार के प्रमुख केंद्र बन रहे हैं, लेकिन इसके साथ ही स्वच्छता, ठोस कचरा प्रबंधन, स्वच्छ पेयजल, किफायती आवास, यातायात जाम, प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, सार्वजनिक स्वास्थ्य और टिकाऊ बुनियादी ढांचे जैसी अनेक जटिल चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। मुंबई में आबादी की तेज वृद्धि का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि करीब 200 वर्ष पहले मुंबई की आबादी लगभग ढाई लाख थी, जबकि आज मुंबई महानगर क्षेत्र की आबादी करीब दो करोड़ तक पहुंच चुकी है। आबादी में हुई इस भारी वृद्धि के कारण नागरिक सुविधाओं पर दबाव बढ़ने के साथ स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी भी कई गुना बढ़ गई है। राज्यपाल ने शहरी क्षेत्रों में ठोस कचरा प्रबंधन को बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि इसका संबंध केवल शहरों की साफ-सफाई से नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और भावी पीढ़ियों के जीवन की गुणवत्ता से भी है। इसलिए स्थानीय निकायों को बदलती परिस्थितियों के अनुरूप आधुनिक और टिकाऊ व्यवस्थाएं विकसित करनी होंगी। उन्होंने संस्थान से निर्वाचित जनप्रतिनिधियों और नगरपालिका कर्मचारियों के लिए अल्पकालिक कौशलवर्धन एवं पुनर्कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलती शहरी जरूरतों का प्रभावी तरीके से सामना करने के लिए जनप्रतिनिधियों और कर्मचारियों को आधुनिक प्रशासनिक व्यवस्थाओं तथा नई तकनीकों से लगातार परिचित कराना आवश्यक है। संस्थान की ओर से आयोजित किए जाने वाले तीसरे विश्व महापौर सम्मेलन का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि ऐसे आयोजन विभिन्न शहरों को अपने अनुभव दुनिया के सामने साझा करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनाई जा रही श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों को समझने तथा उन्हें अपने यहां लागू करने का अवसर प्रदान करते हैं। संस्थान के महानिदेशक जयराज फाटक ने कहा कि संसदीय लोकतंत्र में शहरी स्थानीय स्वशासन संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने बताया कि संस्थान स्थानीय स्वशासन, स्वच्छता निरीक्षक, सामुदायिक विकास, अग्निशमन अभियांत्रिकी, चिकित्सा प्रयोगशाला प्रौद्योगिकी और नगर नियोजन सहित विभिन्न विषयों में पाठ्यक्रम संचालित कर रहा है। संस्थान अब तक करीब 17 लाख युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान कर चुका है। संस्थान के अध्यक्ष रणजीत चव्हाण ने बताया कि शताब्दी वर्ष के अवसर पर इस वर्ष संस्थान की ओर से तीसरे विश्व महापौर सम्मेलन का आयोजन भी किया जाएगा।

